मांफी के बाद जेल जाने से बचे सुब्रत रॉय सहारा, अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को

नई दिल्ली। सुब्रत रॉय सहारा की मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। शुक्रवार को रॉय और उनके दो करीबियों की परोल पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर व अन्य दो जजों की बेंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें मिली तमाम अं​तरिम सहूलियतों को खत्म कर दिया। जस्टिस टीएस ठाकुर ने रॉय के वकील राजीव धवन की दलीलों से नाराजगी के बाद यह कदम उठाया था। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने रॉय व उनके दो सहयोगियों को न्यायिक हिरासत में ले लिया, लेकिन दोपहर बाद वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने रॉय की ओर से पेश होकर व्यक्तिगत तौर पर मांफी मांग कर 30 सितंबर तक सरेन्डर करने की छूट दे दी।




सूत्रों की माने तो रॉय के वकील रजीव धवन ने अदालत के सामने परोल की मियाद बढ़ाने की दलील देते हुए कहा कि अदालत के निर्देश पर सुब्रत रॉय सहारा ने 300 करोड़ के बजाय 354 करोड़ रूपए जमा करवा दिए हैं। जोकि नियत रकम से 54 करोड़ ज्यादा हैं। इसके आगे धवन ने जो कहा उसे लेकर जस्टिस टीएस ठाकुर नाराज हो गए। धवन ने अदालत के सामने कहा कि सेबी ने सहारा समूह के स्वामित्व वाली 58 संपत्तियों को ​नीलामी के जब्त किया है। इस नीलामी प्रक्रिया में उन्हें बतौर वकील सेबी ने शामिल नहीं किया है। अब तक सेबी सहारा की 12 संपत्तियों को 137 करोड़ में बेंच भी चुकी है। जबकि 5 संपत्तियां अस्थाई कुर्की के तहत सेबी के कब्जे में हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक धवन की इस दलील पर जस्टिस टीएस ठाकुर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे अदालत पर दवाब बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे अपनी दलील देने की क्षमता के आधार पर अदालत को कोई फैसला लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। अगर उन्हें लगता है कि अदालत उनकी बात सुने तो सबसे पहले उन्हें न्यायिक हिरासत में जाना होगा। अपनी इस बात के साथ ही जस्टिस ठाकुर ने सुब्रत रॉय सहारा और उनके दो सहयोगियों की परोल को निरस्त करते हुए तुरंत न्यायिक हिरासत में लेने के आदेश जारी कर दिए।




स्थिति बिगती देख इस मामले में एक अन्य वकील रहे कपिल सिब्बल को अदालत के सामने पेश होकर धवन की ओर से निजी तौर पर माफी मांगी और अपने आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की। कपिल सिब्बल की अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ठाकुर ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी फैसले की वजह से किसी को परेशानी हो, लेकिन कई बार वेबजह दवाब बनाने के चलते कठोर फैसले लेने पड़ते हैं।

हालांकि सिब्बल के अपील पर अदालत ने सुब्रत राय सहारा को 30 सितंबर तक सरेंडर करने की छूट देते हुए, अगली सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर की तारीख निश्चित की है।




आपको बता दें कि करीब दो साल तक जेल में रहे सुब्रत रॉय सहारा को 6 मई 2016 को उनकी मां की मृत्यु के बाद मानवीय आधार पर परोल प्रदान की गई थी। जिसे बाद में तीन बार बढ़ाया गया।