सफलता चूमेगी आपके कदम, आज ही अपना लें ये 4 गुण

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कई बार हमें मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। जब हम पुरे मन से काम करते है तो उसका लाभ भी हमें मिलना चाहिए लेकिन कुछ काम है जिनके करने से आपके लाभ में उन्नति हो सकती है।

Success Will Be Your Step Take These 4 Qualities :

करें ये उपाय:

दान देने का गुण: भगवान् परशुराम की दान की प्रवृत्ति का अनुमान इस बात से लगाया जाता है की अश्वमेघ यज्ञ कर उन्होंने सम्पूर्ण प्रथ्वी को जीत लिया था किन्तु सम्पूर्ण प्रथ्वी का दान करके स्वयं महेंद्र पर्वत पर निवास करने चले गए थे।

क्षमा करने का गुण: जब भगवान् राम ने शिव धनुष को तोड़ा तो लक्ष्मण के द्वारा परशुराम से तर्क वितर्क  करने के बाद भगवान् राम के निवेदन पर परशुराम ने लक्ष्मन को क्षमा कर दिया।

माता पिता को ईश्वर माना: एक बार अपने पिता के कहने पर भगवान् परशुराम ने अपना शीश काट कर अलग कर दिया था। उनके पिता ने  प्रसन्न होकर उनकी माता के प्राण उन्हें वरदान में वापस लौटाए थे।

संहारक और भक्ति का गुण: भगवान् परशुराम हमेशा अपने विवेक से कार्य करते थे आवेश में आकर भी उन्हें अपने विवेक पर संयम रखना आता था और उनके आवेश में आना ही उनके जन्म का उद्देश था।

कई बार हमें मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। जब हम पुरे मन से काम करते है तो उसका लाभ भी हमें मिलना चाहिए लेकिन कुछ काम है जिनके करने से आपके लाभ में उन्नति हो सकती है।करें ये उपाय:दान देने का गुण: भगवान् परशुराम की दान की प्रवृत्ति का अनुमान इस बात से लगाया जाता है की अश्वमेघ यज्ञ कर उन्होंने सम्पूर्ण प्रथ्वी को जीत लिया था किन्तु सम्पूर्ण प्रथ्वी का दान करके स्वयं महेंद्र पर्वत पर निवास करने चले गए थे।क्षमा करने का गुण: जब भगवान् राम ने शिव धनुष को तोड़ा तो लक्ष्मण के द्वारा परशुराम से तर्क वितर्क  करने के बाद भगवान् राम के निवेदन पर परशुराम ने लक्ष्मन को क्षमा कर दिया।माता पिता को ईश्वर माना: एक बार अपने पिता के कहने पर भगवान् परशुराम ने अपना शीश काट कर अलग कर दिया था। उनके पिता ने  प्रसन्न होकर उनकी माता के प्राण उन्हें वरदान में वापस लौटाए थे।संहारक और भक्ति का गुण: भगवान् परशुराम हमेशा अपने विवेक से कार्य करते थे आवेश में आकर भी उन्हें अपने विवेक पर संयम रखना आता था और उनके आवेश में आना ही उनके जन्म का उद्देश था।