ऐसे पूरा हुआ ‘मिशन शक्ति’, 300 वैज्ञानिको ने मिलकर किया 6 महीने पूरा

mission shakti

नई दिल्ली। पीएम मोदी की तरफ से बुधवार को दी गई सूचना के मुताबिक अंतरिक्ष में चलाए गए ‘मिशन शक्ति’ के तहत लियो सैटेलाइट को टार्गेट बनाना सक्षम रहा। मिशन शक्ति की सफलता को लेकर पीएम मोदी ने सभी भारतवासी के लिए गर्व महसूस करने की बात कही। ‘लियो सैटलाइट’ पर हुए आक्रमण को लेकर भारत ने दुनिया में अपना चौथा स्थान प्राप्त किया है। हालांकि ये मिशन जितना बताने में आसान था उतना ही मुश्किल था इस मिशन को पूरा करना।

Such A Mission Power Was Completed By 6 Months To 300 Scientist :

डीआरडीओ के वैज्ञानिक सतीश रेड्डी ने कहा कि “पिछले दो साल पहले ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया था। बीते करीब 6 महीने से 300 वैज्ञानिक और स्टाफ दिन रात काम कर रहे थे। इस मिशन को महज 3 मिनट में सैटलाइट को मार गिराया। यह मिशन पूरी तरह से सीक्रट रखा गया था। साथ ही इस परीक्षण से भारत ने बाहरी अंतरिक्ष में अपने एसेट्स को सुरक्षित रखने की क्षमता हासिल कर ली है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन जी. एस. रेड्डी के मुताबिक, वह लगातार इस प्रोजेक्ट पर काम कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल को रिपोर्ट कर रहे थे। अजित डोभाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके मिशन के बारे में पूरी जानकारी दी थी।

आपको बता दें कि इससे पहले इस मिशन को अमेरिका, चीन और रूस ने पूरा किया था के जिसकी पूरी ताकत उनके पास थी, लेकिन अब ये ताकत भारत के पास भी आ चुकी है। खास बात ये है कि चीन ने जब ऐसा परीक्षण किया था तो पूरी दुनिया ने उसकी आलोचना की थी, लेकिन भारत के इस परीक्षण के करने पर कोई भी बड़ा देश हमारे खिलाफ नहीं खड़ा हुआ।

जी. एस. रेड्डी कहना था कि हमने अपने टारगेट को ‘काइनेटिक किल’ यानी सीधा सैटेलाइट को ही हिट किया था। जी. एस. रेड्डी ने बताया कि इसके लिए कई टेक्नॉलोजी का इस्तेमाल किया गया और सभी भारत में ही डेवलेप हुई थीं, जो पूरी तरह सफल साबित हुआ। उनका कहना था कि हमारे पास इससे बड़े लक्ष्य को हासिल करने की भी ताकत है, लेकिन हमने पहले LEO को टारगेट बनाने की ठानी क्योंकि हम किसी भी अन्य देश को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे।

नई दिल्ली। पीएम मोदी की तरफ से बुधवार को दी गई सूचना के मुताबिक अंतरिक्ष में चलाए गए 'मिशन शक्ति' के तहत लियो सैटेलाइट को टार्गेट बनाना सक्षम रहा। मिशन शक्ति की सफलता को लेकर पीएम मोदी ने सभी भारतवासी के लिए गर्व महसूस करने की बात कही। 'लियो सैटलाइट' पर हुए आक्रमण को लेकर भारत ने दुनिया में अपना चौथा स्थान प्राप्त किया है। हालांकि ये मिशन जितना बताने में आसान था उतना ही मुश्किल था इस मिशन को पूरा करना।

डीआरडीओ के वैज्ञानिक सतीश रेड्डी ने कहा कि "पिछले दो साल पहले ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया था। बीते करीब 6 महीने से 300 वैज्ञानिक और स्टाफ दिन रात काम कर रहे थे। इस मिशन को महज 3 मिनट में सैटलाइट को मार गिराया। यह मिशन पूरी तरह से सीक्रट रखा गया था। साथ ही इस परीक्षण से भारत ने बाहरी अंतरिक्ष में अपने एसेट्स को सुरक्षित रखने की क्षमता हासिल कर ली है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन जी. एस. रेड्डी के मुताबिक, वह लगातार इस प्रोजेक्ट पर काम कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल को रिपोर्ट कर रहे थे। अजित डोभाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके मिशन के बारे में पूरी जानकारी दी थी।

आपको बता दें कि इससे पहले इस मिशन को अमेरिका, चीन और रूस ने पूरा किया था के जिसकी पूरी ताकत उनके पास थी, लेकिन अब ये ताकत भारत के पास भी आ चुकी है। खास बात ये है कि चीन ने जब ऐसा परीक्षण किया था तो पूरी दुनिया ने उसकी आलोचना की थी, लेकिन भारत के इस परीक्षण के करने पर कोई भी बड़ा देश हमारे खिलाफ नहीं खड़ा हुआ।

जी. एस. रेड्डी कहना था कि हमने अपने टारगेट को 'काइनेटिक किल' यानी सीधा सैटेलाइट को ही हिट किया था। जी. एस. रेड्डी ने बताया कि इसके लिए कई टेक्नॉलोजी का इस्तेमाल किया गया और सभी भारत में ही डेवलेप हुई थीं, जो पूरी तरह सफल साबित हुआ। उनका कहना था कि हमारे पास इससे बड़े लक्ष्य को हासिल करने की भी ताकत है, लेकिन हमने पहले LEO को टारगेट बनाने की ठानी क्योंकि हम किसी भी अन्य देश को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे।