आतंकवाद बोता और काटता है पाकिस्तान : सुषमा स्वराज

न्यूयार्क। संयुक्त राष्ट्र के 71वें अधिवेशन में वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को बिना नाम लिए पाकिस्तान को जबर्दस्त जवाब देते हुए कहा कि एक देश आतंकवाद बोता है, आतंकवाद निर्यात कतरा है, आतंकवाद को पनाह देता है। ऐसे देश को वैश्विक समुदाय से अलग थलग कर देना चाहिए। अगर पाकिस्तान सोचता है कि वह भड़काऊ बयानों और भाषणों की दम पर कश्मीर हासिल करना चाहता है तो उसे कान खोलकर सुन लेना चाहिए कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था और हमेशा रहेगा।




सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से साफ और स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस शहर में वह बोल रही हैं उसी शहर ने हाल ही में 9/11 के हमले की बरसी मनाई है। जिसके बाद इस शहर ने जल्द में एक आतंकी घटना का सामना किया है। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया भर में इस वर्ष हुई बड़ी आतंकी घटनाओं के साथ पठानकोट और उरी हमले को जोड़ते हुए कहा कि आतंकवाद के रहते विश्व शांति के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ सकता। आतंकवाद को मानवाधिकार से अलग करके देखने का समय आ चुका है। क्योंकि आतंकवाद ही मानवाधिकारों का सबसे बड़ा दुश्मन है। आतंकवादी निर्दोषों को मारते हैं। समय आ चुका है आतंकवाद के खिलाफ दुनिया को एक होना पड़ेगा। हमें अपने फायदे—नुकसान और अहसानों का बदला चुकाने के बजाय यह सुनिश्चि करना होगा कि कौन से देश आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। कौन से देश हैं जो आतंकवादियों को पनाह दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देशों वैश्विक समुदाय से अलग—थलग कर देना चाहिए। आतंकवादियों के पास न तो बैंक हैं और न ही हथियार बनाने की फैक्ट्रियां फिर उन्हें धन और हथियार कहां से मिलते हैं? वो कौन लोग हैं जो आतंकवादियों को संरक्षण देते हैं?

इसके बाद सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान पर हमला करते हुए कहा कि एक देश है जो आतंकवाद बोता है, आतंकवाद काटता है, आतंकवाद को निर्यात करता है। हमें ऐसे देशों को लेकर विचार करना होगा। ये देश छोटे छोटे गुटों में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले संगठनों को पनाह देते हैं। जिससा सामना पूरा विश्व कर रहा है।




इस दौरान सुषमा स्वराज ने 21 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन के दौरान दिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाषण का जवाब देते हुए कहा कि जिनके घर शीशे के होते हैं वे पत्थर नहीं फेंकते। कश्मीर में मानवाधिकार की बात करने से पहले उन्हें बताना चाहिए कि बलूचिस्तान के भीतर जो चल रहा है उसे क्या कहेंगे? बलूचिस्तान के लोगों को यातनाओं की पराकाष्ठा का झेलनी पड़ रही है।

आगे पाकिस्तान के आरोपों पर हमलावर होते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक की सबसे बड़े पैमाने की मित्रता स्थापित करने का प्रयास किया गया। भारत ने पाकिस्तान को ईद की शुभकामनाएं दीं, पीएम मोदी अचानक से करांची पहुंचे, स्वास्थ्य खराब होने पर हालचाल लिए लेकिन बदले मे मिला क्या? हमें पठानकोट मिला, बहादुर अली और उरी मिला। इसके बाद भी पाकिस्तान भारत पर शर्तें लगाने के आरोप लगाता है। बहादुर अली तो हमारे पास जिन्दा सुबूत है कि वह पाकिस्तान से भारत आया है। अगर पाकिस्तान सोचता है कि ऐसे बयान और भाषण देकर वे सोचते हैं कि कश्मीर उन्हें मिल जाएगा तो उन्हें जान लेना चाहिए कि जम्मू कश्मीर भारत भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा।




आपको बता दें कि सुषमा स्वराज ने अपने भाषण की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र के 71वें अधिवेशन में रखे गए 17 एजेंडों पर भारत के योगदान की समीक्षा के साथ की थी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि बीते एक वर्ष में भारत ने 2030 तक के लिए निर्धारित एजेंडों पर भारत ने कितना काम किया है। वह अब तक इन एजेन्डों को लागू करने में कितना सफल रहा है और कितना असफल।