अखिलेश के वादे को पूरा करेंगे योगी, सामने लायेंगे मायाराज के चीनी मिल घोटाले का सच

लखनऊ। वर्ष 2007 से 2012 तक यूपी की मुख्यमंत्री रहीं मायावती के कार्यकाल के सबसे बड़े घोटालों में एक चीनी मिल बिक्री घोटाला एकबार फिर सुर्खियों में है। मायावती के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़े गए 2012 के विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव ने वादा किया था कि वह सत्ता में आने के बाद उन तमाम घोटालों की जांच करवाएंगे जिन्हें मायावती के कार्यकाल के दौरान अंंजाम दिया गया। यूपी की आवाम ने अखिलेश की बात पर भरोसा जताते हुए बहुमत दिया लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश अपने उस वादे को भूल गए। अब अच्छी खबर ये आ रही है कि अखिलेश यादव के वादे को पूरा करने की जिम्मेदारी यूपी के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उठा ली है।




2012 में आई कैग रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 से 2011 के दौरान यूपी सरकार द्वारा 21 चीनी मिलों को औने पौने दामों में बेंचे जाने से सरकारी खजाने को 1100 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। सरकार को हुए इस नुकसान के पीछे की मंशा सत्ताधारी पक्ष के करीबी चन्द औद्योगिक घरानों को सीधे लाभ पहुंचाना था।




जानकारों की माने तो इस घोटाले की नींव तत्काली मुख्यमंत्री मायावती के सबसे करीबी मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकि ने रखी थी। नसीमुद्दीन ने करीब 17 सरकारी चीनी मिलों को औने पौने दामोें में शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा की कंपनियों को बेंच दी। इन चीनी मिलों की जो कीमत सरकार को मिली वह उस जमीन की कीमत के बराबर भी नहीं थी जिन पर चीनी मिलें खड़ीं थी। जिन चीनी मिलों को 20 से 25 करोड़ में प्राइवेट कंपनियों को बेंच दिया गया उनमें मौजूद मशीनों की कीमत कहीं ज्यादा आंकी गई थी।




सूत्रों की माने तो चीनी मिलों की सौदेबाजी में जहां नसीमुद्दीन सिद्दीकि ने पोंटी चढ्ढ़ा के साथ कारोबारी हिस्सेदारी की थी तो मायावती के भाई को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाया गया था। आज करीब सात साल बाद जब यूपी सरकार ने इस घोटाले की जांच की मंशा जाहिर की है तो निश्चित ही इस घोटाले में करोड़ों के बारे न्यारे करने वालों की चिन्ता बढ़ गई होगी।

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