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इस गांव का गजब रिवाज: सुहागन महिला को भी यहां विधवा की तरह बिताने पड़ते हैं दिन, वजह चौकाने वाली

By आराधना शर्मा 
Updated Date

हर गांव के अलग अलग रिवाज और अलग भाषा होती है, हर कोई अपने तरह से अपने रिवाजों का का पालन करता है और ईश्वर को पूजता है लेकिन क्या आप जानतें हैं। कई लोग ऐसे भी है जो इन रिवाजों के चलते कई तरह के समस्या का भी सामना करतें हैं, जी हाँ आज हम आपको एक ऐसे गाँव के रीति रिवार और प्रथा के बारे मे बताने जा रहें जिसे सुनने के बाद आपके होश उद जाएँगे।

दरअसल हम बात कर रहें हैं यूपी के दवरिया का बेलवाड़ा जिले में हर साल तीन महीने का मातम मनाया जाता है। यहां की सुहागनें तीन महीनों तक कोई श्रृंगार नहीं करतीं और विधवाओं जैसा कष्टभरा जीवन जीतीं हैं। तीन महीनों तक एक अजीब सी खामोशी इस गांव में पसरी रहती है। हर तरफ मातम का माहौल छाया रहता है।

सुहागनों के विधवा रूप मे रहने का कारण 

इस गांव के लगभग सभी मर्द पेड़ों से ताड़ी निकालने का कार्य करते हैं। ताड़ के पेड़ 50 फिट से भी ज्यादा ऊंचे होते हैं तथा एकदम सपाट होते हैं। इन पेडों पर चढकर ताड़ी निकालना बहुत जोखिम का कार्य होता है। जिसमें कई बार कुछ लोगों की मौत भी हो जाती है।

जब यहां के मर्द इस काम के लिए बाहर निकलते हैं तो उनकी पत्नियां खुद को विधवा बना लेती हैं और विधवाओं जैसा जीवन व्यतीत करने लग जाती हैं। लेकिन अपने पतियों के वापिस आने पर उनका जोरदार स्वागत करती हैं।

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