सुमित्रा महाजन को पसंद नहीं आया ट्रेन में ‘मसाज’ शुरू करने का आइडिया

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सुमित्रा महाजन को पसंद नहीं आया ट्रेन में 'मसाज' शुरू करने का आइडिया

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने ट्रेनों में मालिश और चंपी की सेवा देने के रेलवे के फैसले पर सवाल उठाए हैं। सुमित्रा महाजन ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा है कि महिला यात्रियों के सामने इस तरह की सर्विस ऑफर करना भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। इसके बजाय यात्रियों को डॉक्टर व चिकित्सा सहायता प्रदान की जानी चाहिए।

Sumitra Mahajan Also Expressed Objection On The Head And Foot Massage Facility In Trains :

महाजन ने आगे कहा कि क्या इस नीतिगत निर्णय को रेल मंत्रालय की स्वीकृति है? इससे महिलाओं की सुरक्षा और सहजता संबंधी सवाल खड़े हो सकते हैं। क्या प्लेटफॉर्म पर भी हेड-फुट मसाज पार्लर खोलने का प्रस्ताव है?

सुमित्रा महाजन से पहले सांसद शंकर लालवानी ने भी मसाज सुविधा का विरोध किया था। रेलवे सलाहकार समिति के सदस्यों ने कहा कि ट्रेनों में मसाज की जरूरत नहीं है। सदस्य जगमोहन वर्मा ने कहा कि अगर रेलवे ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो हम आंदोलन भी करेंगे।

मसाज सुविधा का विरोध करते हुए रेल उपभोक्ता महासंघ के महासचिव योगेंद्र जैन ने कहा कि हेड-फुट मसाज का निर्णय समझ से परे है, इसे शुरू नहीं किया जाना चाहिए। यात्री सुविधा बढ़ाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

आपको बता दे कि पिछले हफ्ते मुंबई मिरर ने सबसे पहले यह जानकारी दी थी कि मसाज सर्विस तीन कैटिगरीज में उपलब्ध होगी- गोल्ड (100 रुपये, नॉन-स्टिकी ऑइल), डायमंड (200 रुपये, ऑइल वाइप्स) और प्लैटिनम (300 रुपये, आर्गन ऑइल, क्रीम और वाइप्स)। पश्चिम रेलवे के मुताबिक, इससे रेलवे 20 लाख रुपये का सालाना रेवेन्यू अर्जित करेगा।

रतलाम रेलवे डिविजनल मैनेजर (डीआरएम) आरएन सुनकर ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि इस प्लान के तहत यात्रियों को फुल बॉडी मसाज की सुविधा नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘सिर्फ सिर और पैर मसाज की सुविधा ही मुहैया कराई जाएगी। यह सर्विस सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच ही मिलेगी।’

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने ट्रेनों में मालिश और चंपी की सेवा देने के रेलवे के फैसले पर सवाल उठाए हैं। सुमित्रा महाजन ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा है कि महिला यात्रियों के सामने इस तरह की सर्विस ऑफर करना भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। इसके बजाय यात्रियों को डॉक्टर व चिकित्सा सहायता प्रदान की जानी चाहिए। महाजन ने आगे कहा कि क्या इस नीतिगत निर्णय को रेल मंत्रालय की स्वीकृति है? इससे महिलाओं की सुरक्षा और सहजता संबंधी सवाल खड़े हो सकते हैं। क्या प्लेटफॉर्म पर भी हेड-फुट मसाज पार्लर खोलने का प्रस्ताव है? सुमित्रा महाजन से पहले सांसद शंकर लालवानी ने भी मसाज सुविधा का विरोध किया था। रेलवे सलाहकार समिति के सदस्यों ने कहा कि ट्रेनों में मसाज की जरूरत नहीं है। सदस्य जगमोहन वर्मा ने कहा कि अगर रेलवे ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो हम आंदोलन भी करेंगे। मसाज सुविधा का विरोध करते हुए रेल उपभोक्ता महासंघ के महासचिव योगेंद्र जैन ने कहा कि हेड-फुट मसाज का निर्णय समझ से परे है, इसे शुरू नहीं किया जाना चाहिए। यात्री सुविधा बढ़ाना प्राथमिकता होनी चाहिए। आपको बता दे कि पिछले हफ्ते मुंबई मिरर ने सबसे पहले यह जानकारी दी थी कि मसाज सर्विस तीन कैटिगरीज में उपलब्ध होगी- गोल्ड (100 रुपये, नॉन-स्टिकी ऑइल), डायमंड (200 रुपये, ऑइल वाइप्स) और प्लैटिनम (300 रुपये, आर्गन ऑइल, क्रीम और वाइप्स)। पश्चिम रेलवे के मुताबिक, इससे रेलवे 20 लाख रुपये का सालाना रेवेन्यू अर्जित करेगा। रतलाम रेलवे डिविजनल मैनेजर (डीआरएम) आरएन सुनकर ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि इस प्लान के तहत यात्रियों को फुल बॉडी मसाज की सुविधा नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा, 'सिर्फ सिर और पैर मसाज की सुविधा ही मुहैया कराई जाएगी। यह सर्विस सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच ही मिलेगी।'