आप में परिवारवाद की एंट्री के संकेत, सीएम अरविन्द पत्नी सुनीता को भेजेंगे राज्यसभा

Arvind Kejriwal, केजरीवाल
माफी मांगकर बड़ी गलती कर गए केजरीवाल, टूट सकती है पार्टी

नई दिल्ली। सत्ता में नीहित ताकत की अनुभूति आदमी को बहुत कुछ भुला देती है। क्या वादे और क्या दावे सब धरे रह जाते हैं, दिखता है तो सिर्फ अपना और अपने परिवार का फायदा। इसका नया उदाहरण भारतीय राजनीति के क्रांतिकारी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल बनते नजर आ रहे हैं। राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद के विरोधी रहे अरविन्द केजरीवाल ने एक समय कहा था कि उनके रहते परिवार का कोई अन्य सदस्य राजनीति में नहीं आएगा। अब उनका वो वादा टूटता नजर आ रहा है। ऐसी खबरें आ रहीं हैं कि अ​रविन्द केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल जल्द ही राज्यसभा पहुंच सकतीं हैं।

सूत्रों की माने तो दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के लिए 2018 में होने वाले चुनाव में सीएम अरविन्द केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल के नाम पर आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में आम सहमति बनती नजर आ रही है। हाल ही में सीएम केजरीवाल के आवास पर हुई पार्टी के शीर्ष नीति निर्धारकों की बैठक में राज्यसभा चुनाव की चर्चा हुई। इस चर्चा में संजय सिंह और आशुतोष कुमार के बाद तीसरे व्यक्ति के रूप में सुनीता केजरीवाल का नाम कई नेताओं ने आगे किया है।

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बताया जा रहा है कि सुनीता केजरीवाल को राज्यसभा भेजने की योजना के तहत ही उन्हें साल 2016 में वीआरएस दिलाया गया था। अरविन्द ने अपने करीबी नेताओं के माध्यम से सुनीता केजरीवाल के नाम को आगे बढ़ाया और अब वह राज्यसभा जाने वाले चेहरों में सबसे मजबूत दावेदार बन गईं हैं। आप के भीतर राज्यसभा जाने के लिए कई दावेदार हैं लेकिन असली लड़ाई ​कवि कुमार विश्वास और सुनीता केजरीवाल के बीच होती नजर आएगी। सुनीता के नाम को आगे कर अरविन्द केजरीवाल एक तीर से दो निशाने लगाते नजर आ सकते हैं। एक ओर वह कुमार विश्वास को पटखनी देंगे तो दूसरी ओर अपनी पत्नी सुनीता को राजनीति में एंट्री दिलवाएंगे।

सुनीता केजरीवाल के राजनीति में आने से उठेंगी उंगलियां —

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आम आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल को करीब से जानने वाले एक पार्टी नेता की माने तो यह केजरीवाल की राजनीति करने की शैली है। वह अपने विरोधियों को पट करने और मनमानी करने के आदी पहले से रहे हैं। सुनीता केजरीवाल का नाम राज्यसभा के लिए कुछ लोगों ने आगे बढ़ाया है ऐसा भी सुनने में आ रहा है। लेकिन आम आदमी पार्टी का कानून है कि एक परिवार से सिर्फ एक आदमी ही राजनीति में आ सकता है। अगर सुनीता केजरीवाल राज्यसभा जातीं हैं तो उस पर सवाल उठेंगे। जिन पर उत्तर देना आसान नहीं होगा।

नई दिल्ली। सत्ता में नीहित ताकत की अनुभूति आदमी को बहुत कुछ भुला देती है। क्या वादे और क्या दावे सब धरे रह जाते हैं, दिखता है तो सिर्फ अपना और अपने परिवार का फायदा। इसका नया उदाहरण भारतीय राजनीति के क्रांतिकारी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल बनते नजर आ रहे हैं। राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद के विरोधी रहे अरविन्द केजरीवाल ने एक समय कहा था कि उनके रहते परिवार का कोई अन्य सदस्य राजनीति में नहीं आएगा। अब उनका…
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