सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आदेश, छात्रों को 10-10 लाख मुआवजा दे मेडिकल कॉलेज

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ के एक मेडिकल कॉलेज को 150 मेडिकल छात्रों की फीस लौटने को कहा। छात्रों को फीस के साथ ही 10-10 लाख का मुआवजा भी देने का आदेश दिया है। कॉलेज को 2018-19 सत्र के एडमिशन पर भी रोक लगा दी गयी।

Supereme Court Order Medical College To Pay 10lakh Rupees Each To 150 Students :

देश की सर्वोच्च अदालत का यह आदेश मेडिकल कॉलेजों में अवैध दाखिले के तार जुडिशरी से जुड़े होने के आरोपों की हो रही जांच के सिलसिले में सामने आया है। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक बेंच को भी जमकर फटकारा गया क्योंकि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी प्रकार का अंतरिम फैसला देने से मना किया था।

वरिष्ठ वकील विकास सिंह और गौरव शर्मा ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की जांच करते हुए कहा कि कॉलेज को एडमिशन देने की सुप्रीम कोर्ट से इजाजत नहीं मिली थी। सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बाद भी हाईकोर्ट ने कॉलेज को दाखिले की इजाजत दे दी। कॉलेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्लीनिकल मटीरियल और फैकल्टी आदि की पर्याप्त सुविधा है या नहीं इस बात की बिना जांच-पड़ताल के ही होईकोर्ट ने इजाजत दे दी।

वहीं इस मामले में कॉलेज का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि हाईकोर्ट के गलतियों की सजा कॉलेज को नहीं देनी चाहिए, लेकिन कोर्ट ने उनके पक्ष को अनसुना कर दिया।

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ के एक मेडिकल कॉलेज को 150 मेडिकल छात्रों की फीस लौटने को कहा। छात्रों को फीस के साथ ही 10-10 लाख का मुआवजा भी देने का आदेश दिया है। कॉलेज को 2018-19 सत्र के एडमिशन पर भी रोक लगा दी गयी।देश की सर्वोच्च अदालत का यह आदेश मेडिकल कॉलेजों में अवैध दाखिले के तार जुडिशरी से जुड़े होने के आरोपों की हो रही जांच के सिलसिले में सामने आया है। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक बेंच को भी जमकर फटकारा गया क्योंकि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी प्रकार का अंतरिम फैसला देने से मना किया था।वरिष्ठ वकील विकास सिंह और गौरव शर्मा ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की जांच करते हुए कहा कि कॉलेज को एडमिशन देने की सुप्रीम कोर्ट से इजाजत नहीं मिली थी। सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बाद भी हाईकोर्ट ने कॉलेज को दाखिले की इजाजत दे दी। कॉलेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्लीनिकल मटीरियल और फैकल्टी आदि की पर्याप्त सुविधा है या नहीं इस बात की बिना जांच-पड़ताल के ही होईकोर्ट ने इजाजत दे दी।वहीं इस मामले में कॉलेज का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि हाईकोर्ट के गलतियों की सजा कॉलेज को नहीं देनी चाहिए, लेकिन कोर्ट ने उनके पक्ष को अनसुना कर दिया।