सुप्रीम कोर्ट ने 25 हफ्ते की गर्भवती को दी गर्भपात की इजाजत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 25 हफ्ते की गर्भवती महिला को गर्भपात कराने की इजाजत दे दी। सुप्रीम कोर्ट में गर्भपात के लिए अपील की गई थी। कोर्ट में यह कहा गया था कि मेडिकल समस्याओं के चलते यह जरूरी है। कोर्ट ने एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया था।

कोलकाता की 25 हफ्ते की गर्भवती महिला के गर्भपात कराने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि महिला का गर्भपात कराया जा सकता है या नहीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता में सात डाक्टरों के पैनल का मेडिकल बोर्ड बनाकर महिला की मेडिकल जांच कराने के आदेश दिए और कोर्ट में सीलबंद कवर में रिपोर्ट सौंपने को कहा था। बोर्ड ने कोर्ट में रिपोर्ट सौंप दी थी।

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याचिकाकर्ता ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 की धारा 3(2)(बी) की संवैधानिक मान्यता को चुनौती दी है, जो 20 सप्ताह से अधिक के भ्रूण के गर्भपात पर रोक लगाती है। उन्होंने दलील दी है कि यह रोक सन् 1971 में उचित थी, जब इस कानून को लागू किया गया था। लेकिन, आज प्रौद्योगिकी उन्नति के दौर में 26 सप्ताह तक गर्भपात कराना बिल्कुल सुरक्षित है।

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