नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, आम आदमी कब तक लाइन में लगा रहेगा

नईदिल्ली। नोटबंदी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई कर रही अदालत ने केन्द्र सरकार से कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने पूछा है कि एक ओर देश का आम आदमी नई करेंसी के लिए लाइनों में लगा है और दूसरी ओर बाजार में इतनी बड़ी मात्रा में नए नोट कैसे मिल रहे हैं? क्या अदालत को यह निर्धारित करना होगा कि बैंक कितनी न्यूनतम राशि ग्राहकों को दे सकती है, जिससे सुनिश्चित हो सके कि देशभर में एक समान बैंकिंग व्यवस्था लागू हो सके?




अदालत के सामने सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रहतोगी ने कहा कि कुछ बैंककर्मियों की गलत नियत के कारण ऐसा हुआ है। सरकार दोषियों को पकड़ने का पूरा प्रयास कर रही है। जहां भी बड़ी मात्रा में नई करेंसी और पुरानी करेंसी बरामद हो रही है, उसे जब्त किया जा रहा है। दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद जल्द ही नई करेंसी को प्रचलन में लाया जाएगा।




अटॉर्नी जनरल ने अदालत के सामने स्पष्ट किया है कि नोटबंदी के मामले पर सियासत हो रही है, वास्तविकता में हालता इतने गंभीर नहीं है। सरकार पर पुराने नोटों को स्वीकार करने की समय सीमा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक 13 लाख करोड़ की पुरानी करेंसी बैंकों में जमा हो चुकी है। नई करेंसी की कालाबाजारी को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं, साथ ही सरकार का प्रयास है कि नई करेंसी में 500 के नोटों के प्रसार में तेजी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि बैंकों को 300 करोड़ रुपये की नई करेंसी रोजना मिलेंगे और यह बैंकों की जरुरत के हिसाब से ही है।




उन्होंने अदालत के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचल में स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए सहकारी बैंकों को करेंसी की उपलब्धता को बढ़ाए जाने का फैसला लिया गया है। इन बैंकों में 10 नवंबर से 14 नवंबर तक जमा की गई पुरानी करेंसी को भारतीय रिजर्व बैंक में जमा करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। यह रकम करीब 8 हज़ार करोड़ रुपये है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार पुराने नोटों पर 30 दिसंबर तक जारी छूट को आगे बढ़ाने को तैयार नहीं है।