मुलायम के कारनामों पर सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से मांगा जवाब

मुलायम के कारनामों पर सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली। 2002—2003 में मुख्यमंत्री रहते मुलायम सिंह यादव ​ने जिस तरह से अपने पारिवार और करीबियों की शैक्षिक संस्थाओं के लिए सरकारी खजाने को लुटाया उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। अदालत ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यूपी की वर्तमान योगी सरकार से पूछा है कि मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में निजी शैक्षिक संस्थाओं को दिए गए 100 करोड़ के अनुदान पर जवाब दाखिल करने को कहा है। इस अनुदान में से 35 करोड़ की रकम मुलामय की परिवारिक सोसाइटी के तहत चलाए जाने वाले चौधरी चरण सिंह पीजी कालेज के खाते में गए हैं।

याचिका की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने यूपी सरकार से कहा है कि वह बताए कि कैसे 100 करोड़ जैसी रकम बिना किसी कानून को ध्यान में रखकर शैक्षिक संस्थाओं को बांटी गई। योगी सरकार को अपना जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इस मामले में अखिलेश यादव के कार्यकाल में यूपी सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा था।

यूपी सरकार की 2002—2003 की आॅडिट करने वाली कैग ने भी अदालत को बताया है कि उसने अपनी रिपोर्ट में चौधरी चरण सिंह पीजी कालेज को गैरकानूनी तरीके से 35 करोड़ का लाभ पहुंचाने का जिक्र किया था।

इटावा के सैफई में स्थित चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज का संचालन मुलायम सिंह यादव के परिवार के स्वामित्व वाली सोसाइटी के अंतर्गत किया जाता है। मुलायम के छोटे भाई शिवपाल यादव और राम गोपाल यादव भी इस कालेज को संचालित करने वाली सोसाइटी के सदस्यों में शामिल हैं।

अदालत ने इस सोसाइटी से भी इस अनुदान के खर्च को लेकर अपने खातों और आयकर प्रमाणपत्र पेश करने के निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने चौधरी चरण सिंह पीजी कालेज में सरकारी खर्चे पर आयोजित किए गए चौधरी चरण सिंह जन्म शताब्दी के कार्यक्रम पर भी सवाल खड़े किए हैं।