बीसीसीआई पर और सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, राज्य संघों को फंड देने पर लगाई रोक

नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई पर सख्त रुख अपनाते हुए उसके फंड ट्रांसफर पर रोक लगा दी है| इतना ही नहीं कोर्ट ने बीसीसीआई द्वारा दायर हलफनामे को नामंजूर कर दिया| कोर्ट ने बीसीसीआई को राज्य संघों को फंड देने पर रोक लगाते हुए कहा कि जब राज्य संघ हलफनामा देंगे, तब उन्हें बीसीसीआई फंड जारी कर सकता है| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन 13 राज्य संघों को टीवी राइट्स का पैसा दिया गया है, वे इस मुद्दे पर साफ आदेश से पहले इसका प्रयोग नहीं कर सकते| कोर्ट ने कहा कि बीसीसीआई को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के संबंध में हलफनामा देना होगा|




इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को फटकार लगाते हुए लोढा समिति की सिफारिशें तुरंत मानने को कहा था| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोढ़ा पैनल कोई मामूली पैनल नहीं है| इसे खुद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीष अध्यक्षता कर रहे हैं इसलिए वक्त बर्बाद न करें और तुरंत उनकी सिफारिशें मानें| कोर्ट ने बीसीसीआई से अंडरटेकिंग भी मांगी कि वह साफ कहे कि लोढ़ा कमेटी द्वारा सुझाए गए सुधार कब तक लागू हो जाएंगे| इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि बीसीसीआई लोढ़ा पैनल की सिफारिशें नहीं मानता है तो उन्हें खुद आदेश देना पड़ेगा|

इससे पहले कोर्ट ने बोर्ड के टॉप ऑफिसर्स की एबिलिटी जाननी चाही| कोर्ट ने पूछा कि बीसीसीआई प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर की एबिलिटी क्या है? इस पर बीसीसीआई के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, “अनुराग ठाकुर सांसद हैं और रणजी टीम के कैप्टन भी रहे हैं|’ इस पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने चुटकी लेते हुए कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट के जजों की टीम का मैं भी कैप्टन था|”




गौरतलब है कि बीसीसीआई में सुधार लाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लोढ़ा कमेटी ने अपनी सिफारिशें दी थी| इन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2016 को मंजूर कर लिया था| उन्हें लागू करने के लिए बीसीसीआई को 4-6 महीने का वक्त दिया गया| शुरुआत में बोर्ड लोढ़ा कमेटी की कई सिफारिशों को मानने को तैयार नहीं था लेकिन सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद 30 सितंबर को बीसीसीआई की स्पेशल जनरल मीटिंग में लोढ़ा कमेटी की कई सिफारिशों को मंजूर कर लिया| अंत में बात कुछ सिफारिशों पर आकर अटक गई| जिसको लेकर बखेड़ा खड़ा हुआ है|

बीसीसीआई ने IND VS NZ सीरीज रद्द करने की दी थी चेतावनी

बीसीसीआई ने मंगलवार को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) आर. एम. लोढ़ा वाली समिति के निर्देश पर बैंकों द्वारा अपना खाता सील किए जाने के बाद नाटकीय प्रतिक्रिया करते हुए न्यूजीलैंड के साथ जारी मौजूदा सिरीज को रद्द करने की चेतावनी दी थी| बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने लोढ़ा समिति के निर्देश पर हैरतअंगेज अंदाज में कहा कि बोर्ड के लिए यह सिरीज जारी रखना संभव नहीं दिख रहा है क्योंकि उसके बैंक खाते सील कर दिए गए हैं और इस कारण बोर्ड धन की निकासी नहीं कर पा रहा है| उल्लेखनीय है कि अभी भारत को न्यूजीलैंड के साथ एक टेस्ट और पांच अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय मैच और खेलने हैं| ठाकुर ने कहा, “इंदौर में होने वाला तीसरा टेस्ट मैच तभी कराया जा सकता है, जब खिलाड़ी और राज्य क्रिकेट संघ बिना पैसा लिए खेलने को तैयार हो जाएं| बोर्ड तो धन की निकासी की स्थिति में नहीं है क्योंकि उसके खाते सील कर दिए गए हैं|”

बकौल ठाकुर, “यह भारतीय टीम के लिए शर्मनाक बात होगी| जिस टीम ने एक दिन पहले नंबर-1 टेस्ट टीम और नंबर-2 टी-20 टीम का दर्जा हासिल किया हो, वह अब दुनिया के सामने वित्तीय गतिरोध का सामना करेगी| यह भी शर्मनाक होगा कि लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे होने के बाद जब बोर्ड ने खिलाड़ियों का वेतन बढ़ाया तो उस पर भी सवाल उठाया गया|” ठाकुर ने आगे कहा, “बीसीसीआई भारत में क्रिकेट के विकास के लिए इतने वर्षो से असीमित कार्य करता आ रहा है, जिसमें इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का बेहद सफल आयोजन भी शामिल हैं| मैं सिर्फ एक सवाल पूछना चाह रहा हूं कि आज भारतीय क्रिकेट जहां खड़ा हैं, वहां तक लाने में क्या बीसीसीआई ने कुछ किया नहीं है?”

वह आगे कहते हैं, “क्रिकेट पैसे के बगैर नहीं कराया जा सकता| हम सरकार से पैसे नहीं लेते\ हमें वेतन लेने की इजाजत नहीं है| मैं भारत-न्यूजीलैंड के बीच इस समय जारी श्रृंखला पर कुछ नहीं कह सकता| हमने अब राज्य क्रिकेट संघों पर ही यह निर्णय छोड़ दिया है कि क्या वे बिना पैसे के न्यूजीलैंड के साथ होने वाले मैचों की मेजबानी कर सकते हैं|” साथ ही ठाकुर ने कहा कि यदि लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशें पूरी तरह लागू कर दी जाएं तो भारत अगले वर्ष इंग्लैंड की मेजबानी में होने वाली चैम्पियंस ट्रॉफी से भी हट सकता है|

लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुसार, आईपीएल से पहले और बाद में भी 15 दिनों का विंडो सत्र होना चाहिए\ हालांकि चैम्पियंस ट्रॉफी अगले साल 1-18 जून के बीच होने वाला है, जबकि आईपीएल का अगला सत्र मई के आखिरी सप्ताह में संपन्न होगा| ठाकुर ने कहा, “ऐसे में मुझे नहीं लगता कि भारत चैम्पियंस ट्रॉफी में हिस्सा ले सकेगा या नहीं। अगर लोढ़ा समिति की सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया जाए तो या तो आप चैम्पियंस ट्रॉफी में हिस्सा ले सकते हैं या आईपीएल में। इसलिए बीसीसीआई को अब इस पर कोई फैसला लेना पड़ेगा|”

उन्होंने कहा, “हमें आईपीएल से ठीक पहले आस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला खेलनी है और आईपीएल के बाद चैम्पियंस ट्रॉफी में हिस्सा लेना है\ ऐसे में बीसीसीआई को फैसला लेना होगा कि भारत चैम्पियंस ट्रॉफी खेलेगा या आईपीएल|” दूसरी ओर, लोढ़ा समिति ने बोर्ड के इस कदम की आलोचना की है| समिति के अनुसार बैंकों को कहा गया है कि वे बीसीसीआई के खातों में इतना धन रहने दें जिससे दैनिक प्रशासनिक कार्य किए जा सकें| ऐसे में न्यूजीलैंड के साथ जारी सिरीज के रद्द करने का कोई सवाल ही नहीं उठता|

न्यायमूर्ति लोढ़ा ने एक समाचार चैनल से कहा, “मेरे खयाल से बीसीसीआई ठीक से समिति की सिफारिश समझ नहीं पाया है| हमने सिर्फ इतना कहा है कि 30 सितंबर को बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार राज्य क्रिकेट संघों को जो अकूत राशि दी गई है उसे अभी रोके रखा जाए|” उन्होंने कहा, “हमने बैंकों को बीसीसीआई के खाते सील करने जैसा कोई आदेश नहीं दिया है| बीसीसीआई दैनिक जरूरतों के लिए भारतीय टीम के संबंध में अपने खातों का इस्तेमाल कर सकती है|”



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