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सुप्रीम कोर्ट में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर फैसला टला, अगली सुनवाई 3 जून को

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक बार फिर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) द्वारा आयोजित कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों बोर्डों ने कोरोना महामारी के चलते कक्षा 12वीं की परीक्षा स्थगित कर दी थीं।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक बार फिर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) द्वारा आयोजित कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों बोर्डों ने कोरोना महामारी के चलते कक्षा 12वीं की परीक्षा स्थगित कर दी थीं। इस संबंध में आज एक बार फिर सुनवाई की गई, जिसमें केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार अगले कुछ दिनों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर अंतिम फैसला लेगी।

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सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर सुनवाई फिलहाल 3 जून तक टल गई है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हमें गुरुवार तक का समय दिया जाए। इसके बाद सरकार अंतिम निर्णय बताएगी। आज हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप जो भी निर्णय लेना चाहते हैं ले सकते हैं। लेकिन याचिकाकर्ता ने उम्मीद जताई है कि पिछले साल अपनाई गई नीति इस साल भी अपनाई जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार पिछले साल के अपने फैसले से हट रही है तो ठोस कारण बताए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार के फैसले के बाद वह इसकी जांच करेगी।अब इस मामले में आज एक बार फिर सुनवाई हुई, जिसे एक बार फिर टाल दिया गया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 3 जून को होगी।

बता दें कि सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सरकार को 1 जून तक फैसला लेना था, लेकिन अब अंतिम फैसला लेने में देरी हो जाएगी। परीक्षाओं को लेकर अब तक दो बार बैठक हो चुकी है। परीक्षाएं कब और कैसे होंगी, इस पर मंथन चल रहा है। इसी बीच इन्हें रद्द कर देने की मांग भी उठ रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन के समय पर सहमति जताते हुए केंद्र और सीबीएसई से गुरुवार तक अपना फैसला साझा करने को कहा है। न्यायमूर्ति खानविलकर ने अटॉर्नी जनरल से कहा, आप एक निर्णय लें। लेकिन अगर आप परीक्षा आयोजित नहीं करने के लिए पिछले साल लिए गए निर्णय से विचलित हो रहे हैं, तो आपको हमें अच्छे कारण बताना चाहिए।

पीठ ने कहा कि जो भी निर्णय उचित हो, वह लें। लेकिन जो चिंताएं व्यक्त की गई हैं। उन्हें ध्यान में रखें। याचिकाकर्ता का कहना है कि पिछले साल की नीति का पालन किया जाना चाहिए। यदि आप पिछले साल की नीति से हटकर निर्णय ले रहे हैं तो आपको उचित कारण बताना होगा। लगभग इसी तरह की स्थिति पिछले वर्ष में थी।

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सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि परीक्षाओं के मामले पर गुरुवार को अंतिम फैसला होगा। कोर्ट इस संबंध में अधिकारियों को समय देना स्वीकार करती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह पिछले साल की नीति के अनुरूप निर्णय की उम्मीद कर रहा है, जब बोर्ड ने परीक्षा रद्द कर दी थी। सीबीएसई ने 26 जून, 2020 को सुप्रीम कोर्ट में लंबी बहस के बाद लंबित कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय प्रस्तुत किया था।

बता दें कि पिछली बैठक में CBSE ने 15 जुलाई से 26 अगस्त के बीच 12वीं बोर्ड परीक्षा आयोजित कराने और सितंबर में परीक्षा के नतीजे घोषित करने का प्रस्ताव दिया था। चर्चा थी कि परीक्षा की तिथि घोषित करने के बीच कम से कम 15 दिन का अंतराल छात्रों को दिया जाएगा। ये भी प्रस्ताव रखा गया था कि सिर्फ प्रमुख विषय के लिए ही परीक्षा कराई जाएं या ऑब्जेक्टिव पैटर्न पर हों और समय सीमा घटा दी जाए। 32 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से 29 परीक्षा को कम अवधि में करने या केंद्र सरकार के निर्णय के साथ हैं।

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