निकाह,हलाला और बहुविवाह को चुनौती देने वाली याचिका पर SC का तत्काल सुनवाई से इंकार

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नई दिल्ली। शीर्ष अदालत ने सोमवार को मुस्लिमों में प्रचलित निकाह, हलाला और बहुविवाह प्रथाओं को चुनौती देने वाली एक याचिका की तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। याचिका करने वाले बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख करते हुए त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया था।

Supreme Court Denies Immediate Hearing On Petition Challenging Nikah Hallala And Polygamy :

न्यायमूर्ति बोबडे ने उनका अनुरोध ठुकराते हुए कहा कि वह मामले की सुनवाई अदालत में सर्दियों की छुट्टियों के बाद करेंगे। अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका दायर करके मुस्लिमों में प्रचलित निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथाओं को असंवैधानिक करार देने की मांग की है।

आपको बता दें कि निकाह हलाला के तहत एक व्यक्ति अपनी पूर्व पत्नी से तब तक दोबारा शादी नहीं कर सकता,जब तक कि वह महिला किसी अन्य पुरूष से शादी कर उससे शारीरिक संबंध नहीं बना लेती और फिर उससे तलाक लेकर अलग रहने की अवधि (इद्दत) पूरा नहीं कर लेती।

अपनी पत्नियों को तलाक देने के बाद जबरन उनका हलाला कराए जाने के लिए दबाव बनाने के मामले को दारुल उलूम वक्फ के उलेमा ने इस्लाम के खिलाफ बताया है। उलेमा-ए-कराम ने कहा कि निकाह महिलाओं की इच्छा पर होता है और उसे किसी पर जबरन नहीं थोपा जा सकता है। उलेमा ने शरीयत के हवाले से बताया कि जबरन या किसी शर्त के साथ हलाला कराना बलात्कार के समान नाजायज है।

बता दें कि बुलंदशहर के गांव अकबरपुर में दो बहनों के साथ दो भाइयों का निकाह हुआ था। इसके बाद बीते 20 अक्तूबर को विवाहिताओं के पतियों ने उन्हें तलाक दे दिया। इसके बाद से वह उन पर हलाला के लिए दबाव बना रहे हैं और न करने पर धमकी दे रहे हैं। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती आरिफ कासमी ने बताया कि दबाव बनाकर हलाला कराना नाजायज है।

उन्होंने कहा कि विवाह के लिए निकाह लड़कियों की मर्जी से होता है। उसे यह अधिकार होता है कि वह हां कहें या इंकार करें। कुछ लोग गलत तरीके से हलाला शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। कासमी ने कहा कि किसी शर्त के साथ हलाला हो ही नहीं सकता है। हलाला की व्याख्या करते हुए बताया इससे साफ है कि दूसरा निकाह करना है।

यदि दूसरा निकाह इस शर्त के साथ किया जाए कि दूसरे पति से तलाक लेकर पहले पति से पुन: विवाह किया जाए तो हराम है। उन्होंने कहा कि यह तो संभंव है कि दूसरे पति से मनमुटाव या उसकी मृत्यु के बाद पहले पति से निकाह कर लिया जाए, मगर तलाक की शर्त के साथ दूसरा निकाह नहीं किया जा सकता।

नई दिल्ली। शीर्ष अदालत ने सोमवार को मुस्लिमों में प्रचलित निकाह, हलाला और बहुविवाह प्रथाओं को चुनौती देने वाली एक याचिका की तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। याचिका करने वाले बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख करते हुए त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया था। न्यायमूर्ति बोबडे ने उनका अनुरोध ठुकराते हुए कहा कि वह मामले की सुनवाई अदालत में सर्दियों की छुट्टियों के बाद करेंगे। अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका दायर करके मुस्लिमों में प्रचलित निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथाओं को असंवैधानिक करार देने की मांग की है। आपको बता दें कि निकाह हलाला के तहत एक व्यक्ति अपनी पूर्व पत्नी से तब तक दोबारा शादी नहीं कर सकता,जब तक कि वह महिला किसी अन्य पुरूष से शादी कर उससे शारीरिक संबंध नहीं बना लेती और फिर उससे तलाक लेकर अलग रहने की अवधि (इद्दत) पूरा नहीं कर लेती। अपनी पत्नियों को तलाक देने के बाद जबरन उनका हलाला कराए जाने के लिए दबाव बनाने के मामले को दारुल उलूम वक्फ के उलेमा ने इस्लाम के खिलाफ बताया है। उलेमा-ए-कराम ने कहा कि निकाह महिलाओं की इच्छा पर होता है और उसे किसी पर जबरन नहीं थोपा जा सकता है। उलेमा ने शरीयत के हवाले से बताया कि जबरन या किसी शर्त के साथ हलाला कराना बलात्कार के समान नाजायज है। बता दें कि बुलंदशहर के गांव अकबरपुर में दो बहनों के साथ दो भाइयों का निकाह हुआ था। इसके बाद बीते 20 अक्तूबर को विवाहिताओं के पतियों ने उन्हें तलाक दे दिया। इसके बाद से वह उन पर हलाला के लिए दबाव बना रहे हैं और न करने पर धमकी दे रहे हैं। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती आरिफ कासमी ने बताया कि दबाव बनाकर हलाला कराना नाजायज है। उन्होंने कहा कि विवाह के लिए निकाह लड़कियों की मर्जी से होता है। उसे यह अधिकार होता है कि वह हां कहें या इंकार करें। कुछ लोग गलत तरीके से हलाला शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। कासमी ने कहा कि किसी शर्त के साथ हलाला हो ही नहीं सकता है। हलाला की व्याख्या करते हुए बताया इससे साफ है कि दूसरा निकाह करना है। यदि दूसरा निकाह इस शर्त के साथ किया जाए कि दूसरे पति से तलाक लेकर पहले पति से पुन: विवाह किया जाए तो हराम है। उन्होंने कहा कि यह तो संभंव है कि दूसरे पति से मनमुटाव या उसकी मृत्यु के बाद पहले पति से निकाह कर लिया जाए, मगर तलाक की शर्त के साथ दूसरा निकाह नहीं किया जा सकता।