आय से अधिक संपत्ति मामले में मुलायम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुलायम ने 1999 से 2005 के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित की। जस्टिस रंजन गोगोई और पीसी पंत की बेंच ने कहा कि सर्वोच्च अदालत 2013 में इन पहलुओं को देख चुकी है। अदालत ने कहा कि अगर प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने अथवा शुरुआती जांच के संदर्भ में कोई शिकायत है तो नई याचिका दायर की जा सकती है।

बेंच ने कहा कि हमारा मानना है कि अंतरिम अर्जी में जो आवेदन किए गए हैं उनके जवाब 13 दिसम्बर, 2012 के फैसले में दे दिए गए थे। इसके अनुसार 2009 के अंतरिम आवेदन में फैसले देने के लिए की गई प्रार्थना विचार के लिए स्वीकार करने योग्य नहीं है। ऐसे में आवेदन को खारिज किया जाता है। वर्ष 2005 में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुव्रेदी की ओर से वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में दायर उन अंतरिम याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं सुनाया था, जिनमें आरोप लगाया गया था कि सीबीआई मुलायम सिंह यादव, उनके मुख्यमंत्री बेटे अखिलेश यादव के खिलाफ जांच सुप्रीम कोर्ट को सूचित किए बिना बंद नहीं कर सकती।





तुलसी ने कहा कि साल 2013 में सीबीआई ने कहा था कि वह सबूत के अभाव के कारण मुलायम सिंह के खिलाफ मामला बंद कर रही है। उन्होंने कहा कि मामले को सिर्फ तभी बंद किया जा सकता है जब सीबीआई औपचारिक क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे। सर्वोच्च अदालत ने तुलसी की दलीलों से सहमति नहीं जताई और याचिका खारिज कर दी।