‘पीपली लाइव’ के सह निर्माता रेप केस में बरी

'पीपली लाइव' के सह निर्माता रेप केस में बरी
'पीपली लाइव' के सह निर्माता रेप केस में बरी

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने कथित दुष्कर्म मामले में ‘पीपली लाइव’ के सह-निर्माता महमूद फारूकी को बरी किए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को शुक्रवार को बरकरार रखा और उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर शिकायतकर्ता की याचिका खारिज कर दी।

Supreme Court Gave Benefit Of Doubt To Peepli Live Director :

न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे और न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी और कहा कि इस मामले में फैसला बहुत अच्छी तरह से दिया गया था, और इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।

फारूकी को निचली अदालत ने दोषी ठहराया था और कोलंबिया विश्वविद्यालय के एक शोधार्थी का यौन शोषण करने के आरोप में उन्हें सात साल कारावास की सजा सुनाई थी। बहस के दौरान फारुकी के वकील ने बताया था कि उस दिन इस तरह की कोई घटना नहीं घटी थी। इसके लिए उन्होंने अपने मुवक्किल और पीड़िता के बीच हुए मैसेज के आदान-प्रदान को पेश करते हुए बताया था कि दोनों जनवरी 2015 से रिलेशनशिप में थे।

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने कथित दुष्कर्म मामले में 'पीपली लाइव' के सह-निर्माता महमूद फारूकी को बरी किए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को शुक्रवार को बरकरार रखा और उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर शिकायतकर्ता की याचिका खारिज कर दी।न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे और न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी और कहा कि इस मामले में फैसला बहुत अच्छी तरह से दिया गया था, और इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।फारूकी को निचली अदालत ने दोषी ठहराया था और कोलंबिया विश्वविद्यालय के एक शोधार्थी का यौन शोषण करने के आरोप में उन्हें सात साल कारावास की सजा सुनाई थी। बहस के दौरान फारुकी के वकील ने बताया था कि उस दिन इस तरह की कोई घटना नहीं घटी थी। इसके लिए उन्होंने अपने मुवक्किल और पीड़िता के बीच हुए मैसेज के आदान-प्रदान को पेश करते हुए बताया था कि दोनों जनवरी 2015 से रिलेशनशिप में थे।