सबरीमाला केस को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच को सौंपा, सात जजों की पीठ करेगी सुनवाई

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सबरीमाला केस को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच को सौंपा, सात जजों की पीठ करेगी सुनवाई

नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश देने का मामला फिर लटक गया है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अपने फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं को गुरुवार को बड़ी बेंच को भेज दिया है। कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर मामले को सुनवाई के लिए सात जजों की पीठ के पास भेज दिया है। हालांकि न्यायालय ने बड़ी पीठ में सुनवाई के बाद फैसला आने तक अपना पूर्व में दिया गया फैसला लागू रखने का निर्णय दिया है।

Supreme Court Hands Over Sabarimala Case To Big Bench Bench Of Seven Judges To Hear :

सीजेआई ने कहा, ‘पूजा स्थलों में महिलाओं का प्रवेश केवल इस मंदिर तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के मस्जिदों और परसी मंदिर में प्रवेश को लेकर भी है। याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य धर्म और विश्वास पर बहस को पुनर्जीवित करना था। सुप्रीम कोर्ट ने 3:2 के बहुमत से पुनर्विचार याचिकाओं को बड़ी बेंच को स्थनां​तरित किया है।

जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसपर असहमति जताई। मंदिर के अंदर महिलाओं के प्रवेश पर बड़ी बेंच का फैसला आने तक अदालत का पूर्ववर्ती फैसला लागू रहेगा। गौरतलब है कि, पिछले साल तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने मंदिर के अंदर सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को इजाजत दी थी।

इस फैसले के बाद लगभग पूरे केरल में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। अदालत ने 4:1 की सहमति से यह फऐसला सुनाते हुए विशेष उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश न करने देने को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। अदालत के फैसले से पहले केरल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश देने का मामला फिर लटक गया है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अपने फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं को गुरुवार को बड़ी बेंच को भेज दिया है। कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर मामले को सुनवाई के लिए सात जजों की पीठ के पास भेज दिया है। हालांकि न्यायालय ने बड़ी पीठ में सुनवाई के बाद फैसला आने तक अपना पूर्व में दिया गया फैसला लागू रखने का निर्णय दिया है। सीजेआई ने कहा, 'पूजा स्थलों में महिलाओं का प्रवेश केवल इस मंदिर तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के मस्जिदों और परसी मंदिर में प्रवेश को लेकर भी है। याचिकाकर्ताओं का उद्देश्य धर्म और विश्वास पर बहस को पुनर्जीवित करना था। सुप्रीम कोर्ट ने 3:2 के बहुमत से पुनर्विचार याचिकाओं को बड़ी बेंच को स्थनां​तरित किया है। जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसपर असहमति जताई। मंदिर के अंदर महिलाओं के प्रवेश पर बड़ी बेंच का फैसला आने तक अदालत का पूर्ववर्ती फैसला लागू रहेगा। गौरतलब है कि, पिछले साल तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने मंदिर के अंदर सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को इजाजत दी थी। इस फैसले के बाद लगभग पूरे केरल में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। अदालत ने 4:1 की सहमति से यह फऐसला सुनाते हुए विशेष उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश न करने देने को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। अदालत के फैसले से पहले केरल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।