महाकाल ज्योर्तिलिंग की पूजा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नए मानक

Mahakaleshwar
महाकाल ज्योर्तिलिंग की पूजा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नए मानक

Supreme Court Issues New Guidelines For Worshiping Mahakaleshwar Jyotirlinga Ujjain

नई दिल्ली। शिवभक्तों की आस्था केन्द्र देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग के क्षरण को रोकने को लेकर सुनवाई कर रहे सुप्रीमकोर्ट ने नए निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक महाकाल शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए केवल आरओ वॉटर भी प्रयोग में लाया जा सकेगा, प्रत्येक श्रद्धालु 500 एमएल यानी आधा लीटर जल से ही अभिषेक कर सकेंगे। दुग्धाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं को मात्र 1.25 लीटर दूध से ही अभिषेक करने की अनुमति होगी।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि महाकाल शिवलिंग के लिए प्रात: होने वाली भस्मारती से पूर्व शिवलिंग को पूरी तरह से ढंका रखा जाए। शकर के बूरे से शिवलिंग को साफ नहीं किया जाएगा। शाम पांच बजे के बाद लिंग पर जलाभिषेक नहीं होगा, और अंतिम जलाभिषेक के बाद मंदिर को सुखाया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई है।

उज्जैन के महाकाल मन्दिर में स्थित भगवान शिव के ज्योर्तिलिंग में हो रहे क्षरण को लेकर उज्जैन की ही एक समाज सेविका सारिका गुरू ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जनहित याचिका दाखिल की थी। जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शिवलिंग के क्षरण की जांच करवाने के बाद सामने आई रिपोर्ट के आधार और वैज्ञानिकों के सुझाव को ध्यान में रखते हुए निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट देश 12 ज्योर्तिलिंगों में से 7 अन्य ज्योर्तिलिंगों को लेकर ऐसे निर्देश जारी कर चुका है।

सागरिका गुरु ने अपनी याचिका में कहा था​ कि ज्योर्तिलिंग पर चढ़ाऐ जाने वाले फूलों, धतूरे, मदार की मालाओं, बेल पत्र, जल और दूध से क्षरण की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शिवलिंग में छोटे छोटे छेद हो रहे हैं जिनमें पनपने वाले वैक्टीरिया ज्योर्तिलिंग को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

नई दिल्ली। शिवभक्तों की आस्था केन्द्र देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग के क्षरण को रोकने को लेकर सुनवाई कर रहे सुप्रीमकोर्ट ने नए निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक महाकाल शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए केवल आरओ वॉटर भी प्रयोग में लाया जा सकेगा, प्रत्येक श्रद्धालु 500 एमएल यानी आधा लीटर जल से ही अभिषेक कर सकेंगे। दुग्धाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं को मात्र 1.25 लीटर दूध से ही अभिषेक करने…