SC की सख्ती पर आपराधिक छवि के नेताओं की बढ़ी मुश्किलें, 27 फीसदी दागी BJP के

नई दिल्ली। आपराधिक मामलों में सजायाप्ता नेताओं पर आजीवन चुनाव लड़ने की पाबंदी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख ने कई बड़े सफेदपोशों की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि सजा पाने वालों के आजीवन चुनाव लड़ने पर पाबंदी का आप समर्थन करते हैं या नहीं?

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई व न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने याचिका कर्ता वकील अश्वनी कुमार उपाध्याय के मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस पर चुनाव आयोग को अपना रुख स्पष्ट करना होगा, चुप्पी साधे रहना कोई विकल्प नहीं है।

{ यह भी पढ़ें:- महकमा मेहरबान तो सरकारी भवन बना प्राइवेट 'गोदाम' }

क्या कहते हैं आंकड़े—

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (एडीआर)की रिपोर्ट की मानें तो अकेले उत्तर प्रदेश के 403 विधायकों में से 143 यानी 36 फीसदी विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 107 विधायकों यानी 26 फीसदी पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

{ यह भी पढ़ें:- मोदीराज में दागी मंत्री व नेताओं की खैर नहीं, जेल जाने को हो जाएं तैयार }

सबसे ज्यादा दागी भाजपा के—

गंभीर प्रवृत्ति के आपराधिक मामलों की बात करें तो इसमें भाजपा अव्वल है। भाजपा के सर्वाधिक 83 यानी 27 फीसद, सपा के 11 (24 फीसद), बसपा के 4 (21 फीसद), कांग्रेस के एक (14 फीसद) और तीन निर्दलीयों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं आंकड़ों के मुताबिक भाजपा के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ हत्या समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

लोकसभा चुनाव के लिए केशव प्रसाद मौर्य ने मई 2014 में जो हलफ़नामा चुनाव आयोग में दाख़िल किया था, उसके मुताबिक़ उनके ख़िलाफ़ 11 आपराधिक मामले हैं। इनमें 302 (हत्या), 153 (दंगा भड़काना) और 420 (धोखाधड़ी) जैसे आरोप शामिल थे।

{ यह भी पढ़ें:- ब्लड कैंसर पीड़िता से तीन नहीं छह लोगों ने किया था गैंगरेप, मंत्री ने इंस्पेक्टर को लगाई फटकार }

वहीं प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि इन आरोपों में उन्हें बाइज्जत बरी किया जा चुका है।

Loading...