अंटू मिश्रा को 27 करोड़ में बचे 13.5 करोड़ भी करवाने होंगे जमा

नई दिल्ली। यूपी में 2007 से 2012 के बीच हुए एनआरएचएम घोटाले की सीबीआई जांच में फंसे यूपी सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अंटू मिश्रा की मुसीबतें बढ़ती नजर आ रहीं हैं। सीबीआई द्वारा अरोपी बनाए गए मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने मंत्री रहते दवा कारोबारियों के इशारे पर स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ के ट्रांसफर और पोस्टिंग के धंधे से करीब 27 करोड़ का भ्रष्टाचार किया था। इस रकम को मिश्रा ने अपने मां—बाप के नाम पर बनी फर्मों के माध्यम से सफेद कर एक बैंक खाते में जमा करवाई थी। इस मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट में मिश्रा के मां—बाप को भी आरोपी बनाया गया है।




मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई की गिरफ्तारी से बचने के लिए अंटू मिश्रा और उनके मां—बाप ने सुप्रीम कोर्ट में 3 नवंबर को याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें सीबीआई द्वारा घोषित 27 करोड़ की रकम में से 13.5 करोड़ रुपए अदालत में जमा करवाने को कहा था। जिसे दो बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से अंटू मिश्रा ने अदालत में जमा करवा दिया था। इस याचिका पर 17 नवंबर को हुई दूसरी सुनवाई के दौरान अदालत ने मिश्रा को शेष 13.5 करोड़ रुपए भी अदालत में जमा करवाने का आदेश दिया है।

अदालत के आदेश के मुताबिक अंटू मिश्रा, उनके पिता दिनेश चन्द्र मिश्रा और मां विमला मिश्रा को सशर्त 30 दिसंबर तक अंतरिम जमानत दी गई है। इस दौरान उन्हें 13.5 करोड़ रुपए अदालत में जमा करवाने होंगे।

मिश्रा के अलावा इस घोटाले की एक अन्य अरोपी मुरादाबाद के दवा कारोबारी सौरभ जैन की पत्नी रजनी जैन को अदालत ने सशर्त जमानत दे दी है। अदालत ने रजनी को जमानत देते हुए उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के निर्धारित भ्रष्टाचार की गई रकम के बराबर नगदी जमा करवाने का आदेश दिया है। सौरभ जैन को एनआरएचएम घोटाले के मुख्य आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा का बेहद करीबी और दत्तक पुत्र कहा जाता था। सौरभ जैन को सीबीआई ने एनआरएचएम घोटाले के कई मामलों में आरोपी बनाया है, फिलहाल वह जमानत पर रिहा है, लेकिन एक मामले में अरोपी बनी उनकी पत्नी को अदालत से अब राहत मिल पाई है।




​जानकारों की माने तो सीबीआई द्वारा करीब 4 मामलों में आरोपी बनाए गए अंटू मिश्रा की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रहीं हैं। गाजियाबाद की सीबीआई विशेष अदालत से 27 करोड़ के मामले में अपने बुजुर्ग माता—पिता को राहत दिलाने के लिए उन्हें अपने बैंक खाते से 27 करोड़ रूपए अदालत में जमा करवाने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाली जमानत पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट हो ही करना है। उनके लिए राहत की बात बस इतनी सी है कि 30 दिसंबर तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई है।