13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को मिली गर्भपात की अनुमति

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता द्वारा गर्भपात करवाने की अपील पर फैसला सुनाते हुए अनुमति दे दी है। इससे पूर्व अदालत ने मुंबई के जेजे अस्पताल के डाक्टरों के एक बोर्ड को पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कर​ रिपोर्ट पेश करने को कहा था। केन्द्र सरकार की ओर से इस मामले की पैरवी कर रहे सॉलीसिटर जनरल रंजीत कुमार ने डॉक्टरों की रिपोर्ट और पूर्व में एक पीड़िता के गर्भपात को लेकर दिए गए अदालत के आदेश का हवाला देते हुए पीड़िता को अनुमति देने की मांग की थी।

मिली जानकारी के मुताबिक कक्षा 7 की छात्रा 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता ने 32 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात करवाने की अनुमति के लिए अदालत के समक्ष अपील दाखिल की थी। जिस पर बुधवार को फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने मेडिकल रिपोर्ट को आधार मानते हुए अनुमति प्रदान कर दी।

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भारतीय गर्भपात कानून की धारा 3(5)(बी) के तहत 20 सप्ताह से अधिक समय के भ्रूण का गर्भपात करवाना अपराध श्रेणी में आता है। लेकिन अदालत ने इस मामले को डॉक्टरों की रिर्पोट और नाबालिग के स्वास्थ्य के आधार पर इस इस मामले को विशेष मानते हुए पीड़िता के पक्ष में फैसला सुना दिया है।

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