सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, पुराने नोट क्यों नहीं जमा कर रहा आरबीआई

Supreme Court Pulls Up Centre On Demonetisation Asks Why Old Notes Are Not Being Accepted From Citizens Till March 31

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री के आश्वासन के बावजूद 30 दिसम्बर, 2016 के बाद आरबीआई में पुराने नोट जमा नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि उसने उन लोगों के लिए अलग श्रेणी बनाने का फैसला क्यों नहीं किया, जो चलन से बाहर हो चुके नोटों को 30 दिसम्बर, 2016 तक जमा नहीं करवा पाए थे। जबकि प्रवासी भारतीयों और विदेशों में मौजूद भारतीयों के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है।




चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर, जस्टिस धनंजय चंद्रचूड़ और संजय किशन कौल की बेंच ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने आठ नवंबर के संबोधन में कहा था कि वैध कारणों वाले लोग 30 दिसंबर, 2016 के बाद भी 31 मार्च, 2017 तक चलन से बाहर हो चुके नोटों को जमा करवा सकते हैं। अदालत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि वास्तविक मुश्किलों वाले लोग चलन से बाहर हो चुके नोटों को 30 दिसंबर, 2016 के बाद भी भारतीय रिजर्व बैंक की शाखाओं में 31 मार्च, 2017 तक जमा करवा सकते हैं। हमें इस बात की वजह बताइए कि कानून के तहत शक्तियां होने के बावजूद आपने उन लोगों के लिए एक श्रेणी क्यों नहीं बनाई, जो चलन से बाहर हो चुके नोटों को 30 दिसम्बर, 2016 से पहले जमा नहीं करवा पाए।

अदालत ने कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन ने यह उम्मीद जगाई थी कि मुश्किल में फंसे लोगों को वैध कारण दिए जाने की स्थिति में 31 मार्च, 2017 तक एक मौका मिलेगा। बेंच ने यह भी कहा कि सरकार को 11 अप्रैल तक एक हलफनामा दायर करके यह बताना चाहिए कि उसने मुश्किल में फंसे लोगों के लिए खिड़की क्यों नहीं बनाई और क्यों यह मौका सिर्फ प्रवासी भारतीयों या उन्हीं नागरिकों को दिया गया, जो विदेश यात्रा पर थे।




अदालत ने केंद्र से यह भी पूछा कि वास्तविक वजहों के चलते अप्रचलित नोटों को जमा करवाने में विफल रहे लोगों को क्या वह एक मौका देना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने छह मार्च को केंद्र और आरबीआई से इस सवाल का जवाब मांगा था कि चलन से बाहर हो चुके नोटों को वादे के मुताबिक 31 मार्च तक स्वीकार क्यों नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने चलन से बाहर हो चुकी मुद्रा को बदलने से जुड़े नियमों से छेड़छाड़ के खिलाफ दायर याचिका पर 10 मार्च को केंद्र और आरबीआई से जवाब मांगा था।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री के आश्वासन के बावजूद 30 दिसम्बर, 2016 के बाद आरबीआई में पुराने नोट जमा नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि उसने उन लोगों के लिए अलग श्रेणी बनाने का फैसला क्यों नहीं किया, जो चलन से बाहर हो चुके नोटों को 30 दिसम्बर, 2016 तक जमा नहीं करवा पाए थे। जबकि प्रवासी भारतीयों और विदेशों में मौजूद भारतीयों के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है। चीफ…