आरक्षण पर बोली सुप्रीम कोर्ट, मुख्य सचिव के परिवार को कैसे माना जाए पिछड़ा

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आरक्षण पर बोली सुप्रीम कोर्ट, मुख्य सचिव के परिवार को कैसे माना जाए पिछड़ा

Supreme Court Questioned Over Reservastion

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सुनवाई की है। क्रीमीलेयर का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जिस तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अमीर लोगों को क्रीमी लेयर के सिद्धांत के तहत आरक्षण का लाभ नही दिया जाता हैं, उसी तरह एससी-एसटी के अमीरों को पदोन्नति में आरक्षण के लाभ से क्यों वंचित नहीं किया जा सकता?

पीठ ने कहा, मान लीजिए, यदि कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ उठाकर किसी भी राज्य का मुख्य सचिव बन जाता है तो कैसे उसके परिवार को पिछड़ा मानकर उसे पदोन्नति में आरक्षण का लाभ दिया जाए। गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल भी किया कि मान लिया जाए कि एक जाति 50 सालों से पिछड़ी है और उसमें एक वर्ग क्रीमीलेयर में आ चुका है, तो इस स्थिती में क्या किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि आरक्षण का मतलब उन लोगों की मदद करने से होता है जो कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं और सक्षम नहीं हैं। ऐसे में इस पहलू पर विचार करना बेहद ज़रूरी है। केंद्र सरकार की तरफ़ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रमोशन में आरक्षण देना सही है या गलत इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन यह तबका 1000 से अधिक सालों से झेल रहा है।

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सुनवाई की है। क्रीमीलेयर का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जिस तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अमीर लोगों को क्रीमी लेयर के सिद्धांत के तहत आरक्षण का लाभ नही दिया जाता हैं, उसी तरह एससी-एसटी के अमीरों को पदोन्नति में आरक्षण के लाभ से क्यों वंचित नहीं किया जा सकता? पीठ ने कहा,…