बिना शर्त नहीं जान पड़ता है आजम का माफी मांगना: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार कांड में अपनी कथित टिप्पणियों को लेकर उत्तर-प्रदेश के विवादास्पद मंत्री आजम खान का माफी मांगना बिना शर्त नहीं जान पड़ता है। जस्टिस दीपक मिश्रा और अमिताव राय की बेंच ने यह टिप्पणी उस समय की, जब अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने आजम खान द्वारा बिना शर्त माफी मांगते हुए दाखिल हलफनामे में यदि और तब जैसे शब्दों पर एतराज किया। खान ने शीर्ष अदालत के 17 नवंबर के निर्देश पर यह हलफनामा दायर किया है।




रोहतगी ने कहा कि हलफनामे में यदि और तब जैसे शब्दों के इस्तेमाल से माफीनामे का उद्देश्य ही खत्म हो गया है, क्योंकि यह बिना शर्त क्षमा-प्रार्थना होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि हलफनामे में खान कह रहे हैं कि उनके बयानों को दुर्भाग्य से गलत तरीके से पेश किया गया। यदि यह गलत रिपोर्टिग का प्रश्न है तब फिर माफीनामा क्यों, यह बिना शर्त माफीनामा नहीं है। वह यदि और तब शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैंं। वह एक साथ दो घोड़ों की सवारी नहीं कर सकते। हालांकि अदालत ने खान के वकील से हलफनामे की प्रति वरिष्ठ वकील फली नरीमन को देने को कहा जो न्यायमित्र के तौर पर अदालत की मदद कर रहे हैं।

Supreme Court Refuses To Accept Azam Khans Apology On Bulandshar Gangrape Case :

अदालत ने कहा कि इसे नरीमन को दिखाइए। यह बिना शर्त माफीनामा नहीं जान पड़ता है। नरीमन ने भी कहा कि यह बिना शर्त माफीनामा नहीं है। आजम खान के वकील ने इसे छोड़ देने की दरख्वास्त की।सुनवाई बहाल होने के बाद खान का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस हलफनामे को नजरअंदाज कर दिया जाए, समाजवादी पार्टी के नेता नया हलफनामा देंगे। रोहतगी ने इस बात पर बल दिया कि इसे बिना शर्त माफीनामे के रूप में नहीं लिया जा सकता। हालांकि अदालत सिब्बल की बात से सहमत हो गई और उसने खान को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।




अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 15 दिसंबर तय करते हुए कहा कि दूसरे प्रतिवादी द्वारा दायर हलफनामे को नजरअंदाज किया जाता है और वह इस अदालत के पिछले निर्देश के संदर्भ में नया हलफनामा दाखिल करेंगे। सुनवाई के आखिर में सिब्बल ने कहा कि मेरे लिए यह कह पाना मुश्किल है कि क्या वह माफीनामा शब्द का इस्तेमाल करेंगे । वह माफीनामे के बजाय अफसोस व्यक्त करना चाहते हैं। इस पर अदालत ने कहा कि वह अगली सुनवाई की तारीख को यह देखेंगे कि बिना शर्त माफी मांगने के लिए अफसोस काफी है या नहीं।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार कांड में अपनी कथित टिप्पणियों को लेकर उत्तर-प्रदेश के विवादास्पद मंत्री आजम खान का माफी मांगना बिना शर्त नहीं जान पड़ता है। जस्टिस दीपक मिश्रा और अमिताव राय की बेंच ने यह टिप्पणी उस समय की, जब अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने आजम खान द्वारा बिना शर्त माफी मांगते हुए दाखिल हलफनामे में यदि और तब जैसे शब्दों पर एतराज किया। खान ने शीर्ष अदालत के 17 नवंबर के निर्देश पर यह हलफनामा दायर किया है। रोहतगी ने कहा कि हलफनामे में यदि और तब जैसे शब्दों के इस्तेमाल से माफीनामे का उद्देश्य ही खत्म हो गया है, क्योंकि यह बिना शर्त क्षमा-प्रार्थना होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि हलफनामे में खान कह रहे हैं कि उनके बयानों को दुर्भाग्य से गलत तरीके से पेश किया गया। यदि यह गलत रिपोर्टिग का प्रश्न है तब फिर माफीनामा क्यों, यह बिना शर्त माफीनामा नहीं है। वह यदि और तब शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैंं। वह एक साथ दो घोड़ों की सवारी नहीं कर सकते। हालांकि अदालत ने खान के वकील से हलफनामे की प्रति वरिष्ठ वकील फली नरीमन को देने को कहा जो न्यायमित्र के तौर पर अदालत की मदद कर रहे हैं।अदालत ने कहा कि इसे नरीमन को दिखाइए। यह बिना शर्त माफीनामा नहीं जान पड़ता है। नरीमन ने भी कहा कि यह बिना शर्त माफीनामा नहीं है। आजम खान के वकील ने इसे छोड़ देने की दरख्वास्त की।सुनवाई बहाल होने के बाद खान का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस हलफनामे को नजरअंदाज कर दिया जाए, समाजवादी पार्टी के नेता नया हलफनामा देंगे। रोहतगी ने इस बात पर बल दिया कि इसे बिना शर्त माफीनामे के रूप में नहीं लिया जा सकता। हालांकि अदालत सिब्बल की बात से सहमत हो गई और उसने खान को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 15 दिसंबर तय करते हुए कहा कि दूसरे प्रतिवादी द्वारा दायर हलफनामे को नजरअंदाज किया जाता है और वह इस अदालत के पिछले निर्देश के संदर्भ में नया हलफनामा दाखिल करेंगे। सुनवाई के आखिर में सिब्बल ने कहा कि मेरे लिए यह कह पाना मुश्किल है कि क्या वह माफीनामा शब्द का इस्तेमाल करेंगे । वह माफीनामे के बजाय अफसोस व्यक्त करना चाहते हैं। इस पर अदालत ने कहा कि वह अगली सुनवाई की तारीख को यह देखेंगे कि बिना शर्त माफी मांगने के लिए अफसोस काफी है या नहीं।