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सुप्रीम कोर्ट की केरल सरकार को फटकार, कहा- जीवन के अधिकार से बड़ा कुछ नहीं, जानें क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद के दौरान राज्य में कोविड-19 पाबंदियों में ढील देने के लिए केरल सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि राज्य सरकार ने व्यापारियों की लॉकडाउन में ढील देने की मांग को स्वीकार कर लिया है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद के दौरान राज्य में कोविड-19 पाबंदियों में ढील देने के लिए केरल सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि राज्य सरकार ने व्यापारियों की लॉकडाउन में ढील देने की मांग को स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य सरकार की तरफ से छूट दिए जाने के बाद कोरोना संक्रमण फैलता है, तो इसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने सरकारी अधिसूचना को रद्द करने से मना कर दिया है।

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बता दें कि मंगलवार को अदालत ने कहा कि किसी भी तरह का दबाव भारत के नागरिक के सबसे मूल्यवान जीवन के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने पर उसे हमारे संज्ञान में लाया जाता है, तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि हम केरल को संविधान के अनुच्छेद 21 के साथ अनुच्छेद 44 पर ध्यान देने और कांवड़ यात्रा को लेकर दिए गए हमारे फैसले पर ध्यान देने का निर्देश देते हैं।

अपने फैसले का बचाव में केरल सरकार ने कोर्ट से कहा कि 15 जून से ही पाबंदियों में ढील दी गई थी। इसमें कुछ नया नहीं था। इसके अलावा सरकार ने उन व्यापारियों की परेशानियों का भी हवाला दिया, जो बकरीद के दौरान आर्थिक हालात बेहतर होने की उम्मीद कर रहे थे। याचिकाकर्ता और सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कोर्ट से आज पाबंदियों से छूट का आखिरी दिन होने के चलते आदेश जारी करने के लिए कहा है। जस्टिस नरीमन ने कहा कि हम नोटिफिकेशन को रद्द नहीं कर सकते हैं।

सीएम ने की थी ढील की घोषणा

राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 17 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि बकरीद को देखते हुए कपड़ों, फुटवेयर, जूलरी, घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक आइटम, सभी तरह की रिपेयरिंग की दुकानें और आवश्यक दुकानों को 18-20 जुलाई के बीच सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक A,B और C इलाकों में संचालित होने की अनुमति दी जाती है। उन्होंने कहा था कि D वर्ग में ये दुकानें केवल 19 जुलाई को ही खुलेंगी। ये इलाके पॉजिटिविटी रेट के हिसाब से तय किए गए हैं।

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कोर्ट ने राज्य सरकार से कोविड-19 की पाबंदियों के खिलाफ एक आवेदन पर जवाब देने के लिए कहा था। इस मामले पर जस्टिस आरएफ नरीमन और बीआर गवई की बेंच ने सुनवाई की थी। कोर्ट की इस बेंच ने ही उत्तर प्रदेश सरकार के उस हलफनामे पर बात की थी, जिसमें कहा गया था कि महामारी के चलते राज्य में इस बार कोई कांवड़ यात्रा नहीं होगी।

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