SC में बोली मोदी सरकार- SC /ST 1000 साल से हाशिये पर, प्रमोशन में आरक्षण जरूरी

SC में बोली मोदी सरकार- SC /ST 1000 साल से हाशिये पर, प्रमोशन में आरक्षण जरूरी
SC में बोली मोदी सरकार- SC /ST 1000 साल से हाशिये पर, प्रमोशन में आरक्षण जरूरी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन में SC-ST आरक्षण से जुड़े 12 साल पुराने नागराज मामले में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच जजों की संविधान पीठ सरकारी नौकरियों में प्रोमोशन में रिजर्वेशन के संवैधानिक पहलुओं पर सुनवाई कर रही है। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण देना सही है या नहीं, हम इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। लेकिन यह समुदाय एक हजार साल से जूझ रहा है। आज भी इन पर अत्याचार हो रहे हैं।

Supreme Court Reservation In Government Job Promotion :

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि एससी-एसटी तबके को आज भी प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत से कहा है कि 2006 के फैसले पर पुनर्विचार की तत्काल जरूरत है। केंद्र ने कहा कि एससी-एसटी पहले से ही पिछड़े हैं इसलिए प्रमोशन में रिजर्वेशन देने के लिए अलग से किसी डेटा की जरूरत नहीं है।

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जब एक बार उन्हें एससी/एसटी के आधार पर नौकरी मिल चुकी है तो पदोन्नति में आरक्षण के लिए फिर से डेटा की क्या जरूरत है? वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2006 के नागराज फैसले के मुताबिक सरकार एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण तभी दे सकती है जब डेटा के आधार पर तय हो कि उनका प्रतिनिधित्व कम है और वो प्रशासन की मजबूती के लिए जरूरी है।

गौरतलब है कि कई राज्य सरकारों ने हाईकोर्ट के प्रमोशन में आरक्षण रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी दलील है कि जब राष्ट्रपति ने नोटिफिकेशन के जरिए SC/ST के पिछड़ेपन को निर्धारित किया है, तो इसके बाद पिछड़ेपन को आगे निर्धारित नहीं किया जा सकता।

राज्यों व SC/ST एसोसिएशनों ने दलील दी कि क्रीमी लेयर को बाहर रखने का नियम SC/ST पर लागू नहीं होता और सरकारी नौकरी में प्रमोशन दिया जाना चाहिए क्योंकि ये संवैधानिक जरूरत है। वहीं हाईकोर्ट के आदेशों का समर्थन करने वालों की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट के नागराज फैसले के मुताबिक इसके लिए ये साबित करना होगा कि सेवा में SC/ST का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और इसके लिए डेटा देना होगा।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन में SC-ST आरक्षण से जुड़े 12 साल पुराने नागराज मामले में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच जजों की संविधान पीठ सरकारी नौकरियों में प्रोमोशन में रिजर्वेशन के संवैधानिक पहलुओं पर सुनवाई कर रही है। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण देना सही है या नहीं, हम इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। लेकिन यह समुदाय एक हजार साल से जूझ रहा है। आज भी इन पर अत्याचार हो रहे हैं।अटॉर्नी जनरल ने कहा कि एससी-एसटी तबके को आज भी प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत से कहा है कि 2006 के फैसले पर पुनर्विचार की तत्काल जरूरत है। केंद्र ने कहा कि एससी-एसटी पहले से ही पिछड़े हैं इसलिए प्रमोशन में रिजर्वेशन देने के लिए अलग से किसी डेटा की जरूरत नहीं है।अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जब एक बार उन्हें एससी/एसटी के आधार पर नौकरी मिल चुकी है तो पदोन्नति में आरक्षण के लिए फिर से डेटा की क्या जरूरत है? वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2006 के नागराज फैसले के मुताबिक सरकार एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण तभी दे सकती है जब डेटा के आधार पर तय हो कि उनका प्रतिनिधित्व कम है और वो प्रशासन की मजबूती के लिए जरूरी है।गौरतलब है कि कई राज्य सरकारों ने हाईकोर्ट के प्रमोशन में आरक्षण रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी दलील है कि जब राष्ट्रपति ने नोटिफिकेशन के जरिए SC/ST के पिछड़ेपन को निर्धारित किया है, तो इसके बाद पिछड़ेपन को आगे निर्धारित नहीं किया जा सकता।राज्यों व SC/ST एसोसिएशनों ने दलील दी कि क्रीमी लेयर को बाहर रखने का नियम SC/ST पर लागू नहीं होता और सरकारी नौकरी में प्रमोशन दिया जाना चाहिए क्योंकि ये संवैधानिक जरूरत है। वहीं हाईकोर्ट के आदेशों का समर्थन करने वालों की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट के नागराज फैसले के मुताबिक इसके लिए ये साबित करना होगा कि सेवा में SC/ST का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और इसके लिए डेटा देना होगा।