मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र पहले से कर रहा है काम, नहीं देंगे दखल

7692Supreme_Court_said_on_the_exodus_of_workers_in_lockdown_-_Center_is_already_doing_work,_will_not_interfere

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के खतरे को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित कर रखा है। हालांकि, इस दौरान देश में प्रवासी मजदूरों के पलायन का नया संकट खड़ा हो गया है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार ने कोर्ट में बताया कि प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जल्द ही इसकी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।

Supreme Court Said On The Exodus Of Workers Center Is Already Doing Work Will Not Interfere :

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत के संघ और सभी राज्य सरकार स्थिति को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस संबंध में जल्द ही एक हलफनामा दायर करना चाहते हैं। इस पर सुप्रम कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए सरकार पहले से ही कई काम कर रही है। ऐसे में अदालत इसमें दखल नहीं देना चाहती। स्टेटस रिपोर्ट मिलने का इंतजार किया जाना चाहिएय़

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता वकील अलख आलोक श्रीवास्तव से कहा, ‘हम सब कुछ से निपट लेंगे, लेकिन केंद्र जो कर रहा है उससे नहीं। हम इसमें बेवजह दखल नहीं देना चाहते हैं।’ चीफ जस्टिस ने कहा कि पहले हम सरकार की ओर से उस हलफनामे को देखना चाहते हैं, जिसे दाखिल करना है, फिर हम इस पर बुधवार को सुनवाई कर सकते हैं।

वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना के चलते लॉकडाउन होने से हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर अपने परिवार के साथ सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। उनके पास न तो रहने की सुविधा है और न ही घर पहुंचने का जरिया, इन लोगों को भयंकर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि अदालत राज्य सरकारों को आदेश दें कि इन लोगों को शेल्टर होम में रखकर सुविधाएं दी जाएं। बता दें कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर 1073 हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस बीमारी से अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है। राहत वाली बात यह है कि 96 मरीज इस बीमारी से ठीक भी हो चुके हैं।

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के खतरे को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित कर रखा है। हालांकि, इस दौरान देश में प्रवासी मजदूरों के पलायन का नया संकट खड़ा हो गया है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार ने कोर्ट में बताया कि प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जल्द ही इसकी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत के संघ और सभी राज्य सरकार स्थिति को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस संबंध में जल्द ही एक हलफनामा दायर करना चाहते हैं। इस पर सुप्रम कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए सरकार पहले से ही कई काम कर रही है। ऐसे में अदालत इसमें दखल नहीं देना चाहती। स्टेटस रिपोर्ट मिलने का इंतजार किया जाना चाहिएय़ प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता वकील अलख आलोक श्रीवास्तव से कहा, 'हम सब कुछ से निपट लेंगे, लेकिन केंद्र जो कर रहा है उससे नहीं। हम इसमें बेवजह दखल नहीं देना चाहते हैं।' चीफ जस्टिस ने कहा कि पहले हम सरकार की ओर से उस हलफनामे को देखना चाहते हैं, जिसे दाखिल करना है, फिर हम इस पर बुधवार को सुनवाई कर सकते हैं। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना के चलते लॉकडाउन होने से हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर अपने परिवार के साथ सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। उनके पास न तो रहने की सुविधा है और न ही घर पहुंचने का जरिया, इन लोगों को भयंकर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि अदालत राज्य सरकारों को आदेश दें कि इन लोगों को शेल्टर होम में रखकर सुविधाएं दी जाएं। बता दें कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर 1073 हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस बीमारी से अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है। राहत वाली बात यह है कि 96 मरीज इस बीमारी से ठीक भी हो चुके हैं।