गर्भपात के लिए पति की सहमति नहीं होगी जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

गर्भपात के लिए पति की सहमति नहीं होगी जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court Says Abortion Is Not A Matter Of Husbands Consent Abortion

नई दिल्ली। गर्भपात को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक अब किसी भी महिला को अबॉर्शन यानी गर्भपात कराने के लिए अपने पति की सहमति लेना जरूरी नहीं होगा। गर्भपात के विवाद के बाद अलग हुए एक दंपति के मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने कहा कि गर्भपात का फैसला लेने वाली महिला वयस्क है, वो एक मां है ऐसे में अगर वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती है तो उसे गर्भपात कराने का पूरा अधिकार है। ये कानून के दायरे में आता है। अदालत ने कहा कि किसी भी बालिग महिला को बच्चे को जन्म देने या गर्भपात कराने का अधिकार है। गर्भपात कराने के लिए महिला को पति से सहमति लेना जरूरी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ए.एम खानविलकर की बेंच के समक्ष पहुंचे इस मामले में पति ने अपनी याचिका में पूर्व पत्नी के साथ उसके माता-पिता, भाई और दो डॉक्टरों पर ‘अवैध’ गर्भपात का आरोप लगाया था। पति ने बिना उसकी सहमति के गर्भपात कराए जाने पर आपत्ति दर्ज की थी। जिस पर अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि एक वयस्क महिला, जो कि एक मां है और वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती है तो उसे गर्भपात कराने का पूरा अधिकार है। ये कानून के दायरे में आता है।

क्या था मामला —

यह केस एक दंपति के बनते बिगड़ते रिश्तों से जन्म लिए विवाद का हिस्सा था। जिसमें पत्नी अपने पति से रोज होने वाले झगड़े से तंग आकर अपने बच्चे को लेकर मायके चली जाती है। दोनों पक्षों के बीच सुलह करवाई जाती है लेकिन कुछ समय के अंतराल के बाद दोनों की शादीशुदा जिन्दगी तलाक पर जाकर खत्म होती है। चूंकि तलाक का मामला शुरू होते समय पत्नी गर्भवती थी इसलिए उसने अपने मां बाप और भाई की सलाह पर गर्भपात करवाने का फैसला लिया।

उस समय महिला ने अपने पति से स​हमति के रूप में हस्ताक्षर करवाने का प्रयास भी किया लेकिन वह उसके तैयार नहीं हुआ। बल्कि गर्भपात होने के बाद उसने अदालत में इस मामले को अदालत ले जाकर 30 लाख के मुआवजे की मांग की। इस मामले में उसने अपनी पत्नी, उसके परिवार और गर्भपात करने वाले डॉक्टर को आरोपी बनाया था।

नई दिल्ली। गर्भपात को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक अब किसी भी महिला को अबॉर्शन यानी गर्भपात कराने के लिए अपने पति की सहमति लेना जरूरी नहीं होगा। गर्भपात के विवाद के बाद अलग हुए एक दंपति के मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने कहा कि गर्भपात का फैसला लेने वाली महिला वयस्क है, वो एक मां है ऐसे में अगर वह बच्चे को जन्म नहीं…