समलैंगिक संबंध अपराध है या नहीं? आज सुप्रीम कोर्ट लेगी अहम फैसला

समलैंगिक संबंध
समलैंगिक संबंध अपराध है या नहीं? आज सुप्रीम कोर्ट लेगी अहम फैसला

Supreme Court Verdict On Section 377

नई दिल्ली। देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट आज आईपीसी की धारा 377 यानि दो समलैंगिक व्यस्क लोगों का संबंध बनाना अपराध है या नहीं इसपर अहम फैसला सुना सकती है। गौरतलब है कि आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक समलैंगिकता को अपराध के दायरे में रखा गया है वहीं इस मामले में आज चीफ दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ अहम फैसला(समलैंगिक संबंध अपराध है या नहीं) सुना सकते हैं।

2017 तक दुनिया के 25 देशों में समलैंगिकों के बीच यौन संबंध को क़ानूनी मान्यता मिल चुकी है।

क्या है धारा 377

आईपीसी की धारा-377 के मुताबिक़, अगर कोई व्यक्ति अप्राकृतिक रूप से यौन संबंध बनाता है तो उसे उम्रक़ैद या जुर्माने के साथ दस साल तक की क़ैद हो सकती है। आईपीसी की ये धारा लगभग 150 साल पुरानी है। इसी व्यवस्था के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में परस्पर सहमति से दो वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन रिश्तों को अपराध की श्रेणी में रखने वाली धारा 377 को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी।

समलैंगिक संबंध के मुद्दे को सबसे पहले 2001 में गैर सरकारी संस्था नाज फाउंडेशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में उठाया था। वहीं हाईकोर्ट ने सहमति से दो वयस्कों के बीच समलैंगिक रिश्ते को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए इससे संबंधित प्रावधान को 2009 में गैर कानूनी घोषित कर दिया था।

2013 में पलटा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में हाईकोर्ट के उक्त आदेश को निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं। इसके बाद सुधारात्मक याचिका दायर की गईं जो अब भी कोर्ट में लंबित है। इस मामले पर 10 जुलाई को सुनवाई शुरू होते ही संविधान पीठ ने स्पष्ट कर दिया था कि वह सुधारात्मक याचिकाओं पर गौर नहीं करेगी लेकिन इस मामले में सिर्फ नई याचिकाओं को ही देखेगी।

नई दिल्ली। देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट आज आईपीसी की धारा 377 यानि दो समलैंगिक व्यस्क लोगों का संबंध बनाना अपराध है या नहीं इसपर अहम फैसला सुना सकती है। गौरतलब है कि आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक समलैंगिकता को अपराध के दायरे में रखा गया है वहीं इस मामले में आज चीफ दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ अहम फैसला(समलैंगिक संबंध अपराध है या नहीं) सुना सकते हैं। 2017 तक दुनिया के 25 देशों…