केरल में ही कुत्तों के काटने की विचित्र समस्या क्यों!

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ताज्जुब जताया कि केरल में कुत्तों द्वारा काटने की ऐसी विचित्र समस्या क्यों है। शीर्ष अदालत द्वारा गठित एक समिति ने चेताया कि अगर आवारा कुत्तों की संख्या को संभाल सकने के स्तर तक नहीं लाया जाता है तो कुत्तों की अत्यधिक संख्या लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत गंभीर खतरा पैदा करती रहेगी।




जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि मैं कई राज्यों में गया। ओडिशा में कुत्तों द्वारा काटने की घटनाएं दुर्लभ हैं। असम में यह दुर्लभ हैं। केरल में कुत्ते द्वारा काटने की समस्या केन्द्रित क्यों है, केरल में कुत्तों द्वारा काटने की विचित्र समस्या क्यों है। हमें यह जानना है। अदालत ने कहा कि अगर समस्या मौजूद है तो पीड़ितों को मुआवजे की बड़ी राशि दी जानी चाहिए।

अदालत की इस मामले में न्याय मित्र के रूप में मदद कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि समस्या गुजरात में भी गंभीर है। याचिकाकर्ता जोस सेबास्टियन की ओर से पेश अधिवक्ता वीके बीजू ने कहा कि दिल्ली में एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, हर छह मिनट में कुत्ते द्वारा काटने की एक घटना होती है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमले केरल में बहुत होते हैं।याचिकाकर्ता सेबास्टियन की पत्नी की आवारा कुत्ते के हमले में मौत हो गई थी। अदालत ने न्याय मित्र से इस समस्या पर नियंतण्रपाने, स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी और पीड़ितों को मुआवजे के बारे में 17 नवम्बर को सुनवाई की अगली तारीख तक विचार करने को कहा।