सर्जिकल स्ट्राइक पर नहीं होनी चाहिए थी राजनीति : पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल

सर्जिकल स्ट्राइक पर नहीं होनी चाहिए थी राजनीति : पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल
सर्जिकल स्ट्राइक पर नहीं होनी चाहिए थी राजनीति : पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल

नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में छिपे बैठे आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के करीब दो साल बाद रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हूडा ने इस पर टिप्पणी की है। हर तरफ सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा हुई। हालांकि इसका जिक्र अब भी होता है। इसी बात से नाराज सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ने अफने विचार रखे। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त सैन्य कमांडर थे।

Surgical Strike Was Overhyped And Politicised Says Ds Hooda :

हूडा ने बातचीत में कहा, ‘मुझे लगता है कि इस मामले को जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया। सेना का ऑपरेशन जरूरी था और हमें यह करना था। अब इस पर इतनी राजनीति हुई, यह सही है या गलत… यह तो हमें राजनेताओं से पूछना चाहिए।’

वहीं नियंत्रण रेखा पर होने वाली किसी अप्रिय घटना से सीमा पर तैनात सैनिकों को कैसे निपटना चाहिए? इस सवाल के जवाब में हूडा कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि नियंत्रण रेखा पर जिस तरह की चीजें हो रही हैं, उस सूरत में जब तक पाकिस्तान तनाव कम करने या घुसपैठ रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाता है, तब तक हमें बेहद सक्रिय और अप्रत्याशित जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।’

जनरल हुड्डा यहां सैन्य साहित्य महोत्सव 2018 के पहले दिन सीमा पार अभियानों और सर्जिकल स्ट्राइक की भूमिका विषय पर चर्चा में बोल रहे थे। पंजाब सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक, इस कार्यक्रम में सेना के पूर्व जनरलों और कमांडरों के साथ पंजाब के राज्यपाल वी पी सिंह बदनोर शामिल हुए। युद्ध में भाग ले चुके कई अनुभवी अधिकारियों ने सैन्य अभियानों के राजनीतिकरण के खिलाफ आगाह किया।

लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा ने कहा कि सफलता को लेकर शुरुआती खुशी स्वाभाविक है लेकिन सैन्य अभियानों का लगातार प्रचार करना अनुचित है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह बेहतर होता कि ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी गोपनीय रखी जाती।

नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में छिपे बैठे आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के करीब दो साल बाद रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हूडा ने इस पर टिप्पणी की है। हर तरफ सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा हुई। हालांकि इसका जिक्र अब भी होता है। इसी बात से नाराज सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ने अफने विचार रखे। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त सैन्य कमांडर थे।हूडा ने बातचीत में कहा, 'मुझे लगता है कि इस मामले को जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया। सेना का ऑपरेशन जरूरी था और हमें यह करना था। अब इस पर इतनी राजनीति हुई, यह सही है या गलत... यह तो हमें राजनेताओं से पूछना चाहिए।'वहीं नियंत्रण रेखा पर होने वाली किसी अप्रिय घटना से सीमा पर तैनात सैनिकों को कैसे निपटना चाहिए? इस सवाल के जवाब में हूडा कहते हैं, 'मुझे लगता है कि नियंत्रण रेखा पर जिस तरह की चीजें हो रही हैं, उस सूरत में जब तक पाकिस्तान तनाव कम करने या घुसपैठ रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाता है, तब तक हमें बेहद सक्रिय और अप्रत्याशित जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।'जनरल हुड्डा यहां सैन्य साहित्य महोत्सव 2018 के पहले दिन सीमा पार अभियानों और सर्जिकल स्ट्राइक की भूमिका विषय पर चर्चा में बोल रहे थे। पंजाब सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक, इस कार्यक्रम में सेना के पूर्व जनरलों और कमांडरों के साथ पंजाब के राज्यपाल वी पी सिंह बदनोर शामिल हुए। युद्ध में भाग ले चुके कई अनुभवी अधिकारियों ने सैन्य अभियानों के राजनीतिकरण के खिलाफ आगाह किया।लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा ने कहा कि सफलता को लेकर शुरुआती खुशी स्वाभाविक है लेकिन सैन्य अभियानों का लगातार प्रचार करना अनुचित है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह बेहतर होता कि ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी गोपनीय रखी जाती।