अलविदा सुषमा: पाकिस्तानी जेल से लौटे हामिद ने याद कर कहा- ‘वह मेरे लिए मां की तरह थीं’

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अलविदा सुषमा: पाकिस्तानी जेल से लौटे हामिद ने याद कर कहा- 'वह मेरे लिए मां की तरह थीं'

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति की एक ऐसी नेता जो एक कुशल वक्ता, राजनीतिक पुरोधा और अपने काम से आम जनमानस को अपना मुरीद बनाने वाली शख्सियत सुषमा स्वराज आज इस दुनिया से अलविदा कह चुकी हैं। उनके चाहने वाले करोड़ों भारतीयो की आंखें आज नम हैं। सुषमा को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लाल कृष्ण आडवाणी की आंखें नम हो गईं।

Sushma Swaraj Was Like Mother For Many People Are In Memory Of Her :

विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐसे काम किए, जो आज भी एक मिसाल हैं। कभी पासपोर्ट में दिक्कत तो कभी विदेशों में फंसे भारतीयों को छुड़ाना। अक्सर ऐसे मामलों में सुषमा व्यक्तिगत तौर पर मदद के लिए आगे आ जाती थीं।

उन्हीं में से एक मामला पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था। पाकिस्तानी जेल में बंद हामिद अंसारी को भारत लाने में सबसे बड़ा योगदान सुषमा स्वराज का रहा। हामिद ने भारत आते ही सबसे पहले सुषमा स्वराज से मुलाक़ात की और भावुक होकर उनके सामने रो पड़े। आज उनके निधन पर हामिद कहते हैं, “वह मेरे लिए मां की तरह थीं। उनके लिए मेरे मन में गहरा सम्मान है। वह हमेशा मेरे दिल में जिंदा रहेंगी।”

इसी तरह सऊदी अरब में फंसी जैनब बी को भी सुरक्षित वतन वापस लाने में सुषमा स्वराज ने काफी मदद की थी। सुषमा के निधन की खबर सुनकर जैनब भावुक हो गईं। रोते हुए उन्होंने कहा, ‘मेरी मैडम ने बहुत हेल्प करी थी। सुषमा मैडम को जन्नत में जगम मिले।

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति की एक ऐसी नेता जो एक कुशल वक्ता, राजनीतिक पुरोधा और अपने काम से आम जनमानस को अपना मुरीद बनाने वाली शख्सियत सुषमा स्वराज आज इस दुनिया से अलविदा कह चुकी हैं। उनके चाहने वाले करोड़ों भारतीयो की आंखें आज नम हैं। सुषमा को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लाल कृष्ण आडवाणी की आंखें नम हो गईं। विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐसे काम किए, जो आज भी एक मिसाल हैं। कभी पासपोर्ट में दिक्कत तो कभी विदेशों में फंसे भारतीयों को छुड़ाना। अक्सर ऐसे मामलों में सुषमा व्यक्तिगत तौर पर मदद के लिए आगे आ जाती थीं। उन्हीं में से एक मामला पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था। पाकिस्तानी जेल में बंद हामिद अंसारी को भारत लाने में सबसे बड़ा योगदान सुषमा स्वराज का रहा। हामिद ने भारत आते ही सबसे पहले सुषमा स्वराज से मुलाक़ात की और भावुक होकर उनके सामने रो पड़े। आज उनके निधन पर हामिद कहते हैं, "वह मेरे लिए मां की तरह थीं। उनके लिए मेरे मन में गहरा सम्मान है। वह हमेशा मेरे दिल में जिंदा रहेंगी।" इसी तरह सऊदी अरब में फंसी जैनब बी को भी सुरक्षित वतन वापस लाने में सुषमा स्वराज ने काफी मदद की थी। सुषमा के निधन की खबर सुनकर जैनब भावुक हो गईं। रोते हुए उन्होंने कहा, 'मेरी मैडम ने बहुत हेल्प करी थी। सुषमा मैडम को जन्नत में जगम मिले।