स्वच्छ भारत मिशन: राजधानी समेत शौचालय निर्माण में ये 23 जिले निकले फिसड्डी

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Swachh Bharat Mission These 23 Districts Have Gone Missing In The Construction Of Toilets Including The Capital

लखनऊ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत भले ही सरकार पैसे को पानी की तरह बहा रही हो लेकिन सवाल यह है कि इससे लाभ कितना हो रहा है, जनता को सुविधाएं कितनी मिल रही हैं, धरातल पर इसका फायदा हो भी रहा है या नहीं। शहरों में साफ सफाई के नाम पर दिखने वाला बैनर-होर्डिंग क्या गांव की गलियों तक पहुँच पा रहा है। अब पीएम मोदी ने गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाने की बात कर रहें हैं लेकिन इनके मंत्री अफसर इससे कन्नी काटते दिख रहे हैं। पंचायतीराज विभाग के हालात तो इतने बदतर हैं जैसा लगता है उनसे उम्मीद करना खुद से बेईमानी होगी।

मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में 23 जिले निर्माण करने की लक्ष्यपूर्ति में फिसड्डी मिले। हालांकि पंचायतीराज निर्देशालय में समीक्षा करते हुए राज्यमंत्री भूपेंद्र सिंह ने स्वच्छ भारत मिशन योजना में शौचालय के निर्माण कार्य में पिछड़े जिलों के अधिकारियों को दिसंबर के अंत तक लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने शख्त हिदायत देते हुए कहा कि इसमे लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इन सब के बावजूद पंचायतीराज विभाग निर्धारित तारीख तक काम कर ले जाए इसकी संभावना कम ही नज़र आ रही है।

ये जिले हैं फिसड्डी

लखनऊ सहित मैनपुरी, अलीगढ़, इल्हाबाद, फ़तेहपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, बस्ती, महोबा, सिद्धार्थनगर, चित्रकूट, बाराबंकी, फैजाबाद, सुल्तानपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, कानपुर देहात, हरदोई, लखीमपुर , सीतापुर, उन्नाव और संभल जिलों के पंचायतीराज अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये गए।

बता दें, पीएम मोदी ने वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य शहर व गांवों को स्वच्छ रखना तथा खुले में शौच से मुक्ति दिलाना है। पेयजल व स्वच्छता प्रमंडल के माध्यम से ग्रामीण इलाके में शौचालय बनाया जा रहा है। अभियान को सफल बनाने के लिए काफी प्रचार-प्रसार भी किया गया लेकिन धरातल पर इसका फायदा नहीं दिख रहा। ग्रामीण इलाके के लोग अभी भी खुले में शौच करने जा रहें हैं। जिनके घरों में शौचालय बन चुका है वे भी खुले में शौच करते हैं। पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल ने जिले के सभी छह प्रखंडों में वर्ष 2014 से लेकर अब तक करीब 42000 शौचालय बना चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष में भी शौचालय निर्माण का काम जारी है। लेकिन जागरूकता के अभाव में अधिकतर ग्रामीण खेतों में शौच के लिए जा रहें हैं। कई इलाकों में पानी के अभाव में शौचालय बेकार साबित हो रहा है।

लखनऊ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत भले ही सरकार पैसे को पानी की तरह बहा रही हो लेकिन सवाल यह है कि इससे लाभ कितना हो रहा है, जनता को सुविधाएं कितनी मिल रही हैं, धरातल पर इसका फायदा हो भी रहा है या नहीं। शहरों में साफ सफाई के नाम पर दिखने वाला बैनर-होर्डिंग क्या गांव की गलियों तक पहुँच पा रहा है। अब पीएम मोदी ने गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाने की बात कर रहें हैं लेकिन…