अनशन पर बैंठी स्वाति मालीवाल की तबियत बिगड़ी, अचानक हुईं बेहोश, अस्पताल में भर्ती

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अनशन पर बैंठी स्वाति मालीवाल की तबियत बिगड़ी, अचानक हुईं बेहोश, अस्पताल में भर्ती

नई दिल्ली। दुष्कर्म के आरोपियों को छह महीने के भीतर फांसी देने की मांग को लेकर धरने पर बैंठी दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की तबियत अचानक बिगड़ गयी। इस कारण उन्हें लोक नारायण जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वाती मालीवाल के धरने का आज 13वां दिन है।

Swathi Maliwals Health Deteriorated On Hunger Strike Suddenly Fainted Hospitalized :

बता दें कि, भूख हड़ताल के कारण स्वाति मालीवाल का वजन घट गया है। इसके साथ ही वह बहुत कमजोर हो गयीं हैं, जिसके कारण वह बातचीत भी नहीं कर पा रहीं हैं। धरने पर बैठने के कारण रविवार सुबह वह अचानक बेहोश हो गयीं। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बता दें कि, स्वाति मालीवाल ने एक दिन पहले शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे देश में तेलंगाना की तर्ज पर ‘दिशा विधेयक’ लागू करने की मांग की है, जिसमें महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों को 21 दिन के भीतर निर्धारित करने और दुष्कर्म के मामलों में 21 दिन के भीतर फांसी देने का प्रावधान है। इसके साथ ही उन्होंने इस संजीदा मुद्दे पर केंद्र सरकार की लगातार उदासीनत पर भी सवाल उठाया था।

नई दिल्ली। दुष्कर्म के आरोपियों को छह महीने के भीतर फांसी देने की मांग को लेकर धरने पर बैंठी दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की तबियत अचानक बिगड़ गयी। इस कारण उन्हें लोक नारायण जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वाती मालीवाल के धरने का आज 13वां दिन है। बता दें कि, भूख हड़ताल के कारण स्वाति मालीवाल का वजन घट गया है। इसके साथ ही वह बहुत कमजोर हो गयीं हैं, जिसके कारण वह बातचीत भी नहीं कर पा रहीं हैं। धरने पर बैठने के कारण रविवार सुबह वह अचानक बेहोश हो गयीं। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। बता दें कि, स्वाति मालीवाल ने एक दिन पहले शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे देश में तेलंगाना की तर्ज पर 'दिशा विधेयक' लागू करने की मांग की है, जिसमें महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों को 21 दिन के भीतर निर्धारित करने और दुष्कर्म के मामलों में 21 दिन के भीतर फांसी देने का प्रावधान है। इसके साथ ही उन्होंने इस संजीदा मुद्दे पर केंद्र सरकार की लगातार उदासीनत पर भी सवाल उठाया था।