स्विस बैंकों की गोपनीयता गारंटी की वजह से इनमें जमा होता है कालाधन

नई दिल्ली। अपनी खूबसूरती के साथ ही पैसो के स्वर्ग के नाम से पहचान बनाने वाला स्विटजरलैंड अपनी बैंकिंग प्रणाली के लिए पूरे विश्व में अलग स्थान रखता है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां संचालित बैंकों की गोपनीयता की शर्त है। इसी खासियत के ​चलते दुनिया भर के लोग अपना कालाधन यहां की बैंकों में जमा करते है। हाल ही जारी रिपोर्ट के मुताबिक यहां की बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा किए गए पैसों में 50 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई है। रिपोर्ट में बताया कि यहां भारतीयों का करीब 7000 हजार रूपए जमा है।

Swiss Bank Never Disclose Their Custumers Identity Thats Why People Deposit Blackmoney There :

बता दें कि स्विस बैंकों में 68 लाख रूपए से खाता खुलता है। अब ऐसे में ये कहना है कि स्विस बैंकों में जमा पैसा काला धन नही है, ये किसी मजाक से कम नही है। जानकारों की मानें तो स्विटजरलैंट में कुल 400 बैंक हैं, जहां दुनियाभर के लोग अपनी काली कमाई जमा करते है। बैंक ग्राहकों से प्रतिवर्ष 20 हजार रूपए मेंटीनेंस चार्ज लेता है। इसके एवज में वो गोपनीयता की पूरी गारंटी भी देता हैं। यही वजह है कि ज्यादातर कालाधन यही की बैंकों में जमा होता है।

बता दें कि खाताधारक अपनी प्राइवेसी बरकरार रखने के लिए ऐसे स्विस बैंकों का चुनाव करते हैं, जिनकी उनके देश में ब्रांच न हो,क्योंकि अगर बैंक स्विटजरलैंड से बाहर होगी तो उस पर उसी देश का कानून लागू होगा, ऐसे में ग्राहक की गोपनीयता बरकरार रखना नामु​मकिन है। बता दें कि स्विस बैंकों में खाता खुलवाने वाले का नाम वहां के कर्मचारियों को भी नही पता होता हैं, यहां सारा काम सिर्फ आईडी से ही चलता है।

ऐसे खुलता हैं स्विस बैंकों में खाता

अपना कालाधन छिपाने के लिए जो लोग स्विस बैंकों में खाता खुलवाते हैं, उन्हे फिजिकल तौर पर वहां जाना जरूरी होता है। खाता खुलवाने के दौरान उन्हे एक नंबर दिया जाता है, इसी नंबर की मदद से वो बैंक के साथ ट्रांजैक्शन करता है। इसके साथ ही खाता खुलवाने के लिए पोसपोर्ट की आॅथेन्टिक कॉपी, कंपनी के डॉक्यूमेंट और प्रोफेशनल लाइसेंस भी जरूरी होता है। खाता खुलने के बाद ग्राहक डायरेक्ट कैश निकालता हैं, जिससे की उसकी गोपनीयता भंग न हो। इसके अलावा वो चेक से भी रकम निकाल सकता है, इन बैंकों के चेक सभी जगह स्वीकार किए जाते है, लेकिन चेक से रकम निकालने पर बैंक को एक फीसदी कमीशन देना पड़ता है।

नई दिल्ली। अपनी खूबसूरती के साथ ही पैसो के स्वर्ग के नाम से पहचान बनाने वाला स्विटजरलैंड अपनी बैंकिंग प्रणाली के लिए पूरे विश्व में अलग स्थान रखता है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां संचालित बैंकों की गोपनीयता की शर्त है। इसी खासियत के ​चलते दुनिया भर के लोग अपना कालाधन यहां की बैंकों में जमा करते है। हाल ही जारी रिपोर्ट के मुताबिक यहां की बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा किए गए पैसों में 50 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई है। रिपोर्ट में बताया कि यहां भारतीयों का करीब 7000 हजार रूपए जमा है। बता दें कि स्विस बैंकों में 68 लाख रूपए से खाता खुलता है। अब ऐसे में ये कहना है कि स्विस बैंकों में जमा पैसा काला धन नही है, ये किसी मजाक से कम नही है। जानकारों की मानें तो स्विटजरलैंट में कुल 400 बैंक हैं, जहां दुनियाभर के लोग अपनी काली कमाई जमा करते है। बैंक ग्राहकों से प्रतिवर्ष 20 हजार रूपए मेंटीनेंस चार्ज लेता है। इसके एवज में वो गोपनीयता की पूरी गारंटी भी देता हैं। यही वजह है कि ज्यादातर कालाधन यही की बैंकों में जमा होता है। बता दें कि खाताधारक अपनी प्राइवेसी बरकरार रखने के लिए ऐसे स्विस बैंकों का चुनाव करते हैं, जिनकी उनके देश में ब्रांच न हो,क्योंकि अगर बैंक स्विटजरलैंड से बाहर होगी तो उस पर उसी देश का कानून लागू होगा, ऐसे में ग्राहक की गोपनीयता बरकरार रखना नामु​मकिन है। बता दें कि स्विस बैंकों में खाता खुलवाने वाले का नाम वहां के कर्मचारियों को भी नही पता होता हैं, यहां सारा काम सिर्फ आईडी से ही चलता है।

ऐसे खुलता हैं स्विस बैंकों में खाता

अपना कालाधन छिपाने के लिए जो लोग स्विस बैंकों में खाता खुलवाते हैं, उन्हे फिजिकल तौर पर वहां जाना जरूरी होता है। खाता खुलवाने के दौरान उन्हे एक नंबर दिया जाता है, इसी नंबर की मदद से वो बैंक के साथ ट्रांजैक्शन करता है। इसके साथ ही खाता खुलवाने के लिए पोसपोर्ट की आॅथेन्टिक कॉपी, कंपनी के डॉक्यूमेंट और प्रोफेशनल लाइसेंस भी जरूरी होता है। खाता खुलने के बाद ग्राहक डायरेक्ट कैश निकालता हैं, जिससे की उसकी गोपनीयता भंग न हो। इसके अलावा वो चेक से भी रकम निकाल सकता है, इन बैंकों के चेक सभी जगह स्वीकार किए जाते है, लेकिन चेक से रकम निकालने पर बैंक को एक फीसदी कमीशन देना पड़ता है।