रिहाई के बावजूद भी तलवार दंपति को महीने में दो बारा जाना पड़ेगा जेल, जानें वजह…

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री आरुषि-हेमराज हत्याकांड में करीब चार साल जेल की सजा काट चुके आरुषि के माता-पिता डॉक्टर राजेश और नुपुर तलवार सोमवार को दोपहर करीब 2:30 बजे तक रिहा हो सकते। हालांकि जेल से बरी होने के बावजूद भी डॉक्टर राजेश और नुपुर को महीने में हर 15 दिनों के अंतराल में गाजियाबाद की डासना जेल जाना पड़ेगा। यहां पर दोनों उन कैदियों की जांच करेंगे, जिनके दांत खराब हैं या फिर अन्य कोई समस्या है। बता दें कि आरुषि के पिता राजेश और मां नूपुर तलवार पेशे से दांतों के डॉक्टर हैं।

बंद पड़े क्लीनिक को चमका दिया था राजेश और नुपुर ने
सजा पाने के बाद यहां चार साल तक जेल में रहने के दौरान राजेश और नुपुर तलवार ने कारागार अस्पताल में तकरीबन बंद हो चुके दंत चिकित्सा विभाग को फिर से खड़ा करने का काम किया। वहीं, राजेश और नूपुर की रिहाई के बाद दांत से परेशान मरीजों की भीड़ को देखते हुए कारागार अधिकारियों ने गाजियाबाद के एक डेंटल कॉलेज के साथ समझौता किया है।

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लाइन लगाकर कैदियों ने कराया इलाज

तलवार दंपति की रिहाई को ध्यान में रखते हुए उनके साथ जेल में बंद कैदियों ने आज सुबह लाइन लगा कर अपना इलाज करवाया। माना जा रहा है कि आज तलवार दंपति जेल से रिहा हो जाएंगे। वहीं जेल के कैदी इस बात से थोड़े निराश जरूर हैं।


छोड़ दिया जेल में कमाया पैसा

जेल में डेंटल क्लीनिक के सेटअप में तलवार दंपति ने अहम योगदान किया है। उन्होंने तमाम डेंटल उपकरण भी जेल को मुहैया कराए हैं। इसके अलावा जेल में रहने के दौरान कैदियों के इलाज के एवज में मिलने वाला रोजना 40 रूपए मेहनताना भी नहीं लिया है। तलवार दंपति ने जेल में बिताए अपने 1417 दिनों के दौरान करीब 99 हजार रुपये कमाए थे। इसमें राजेश तलवार का अब तक बंदी के तौर पर जेल में अपनी सजा काटने के दौरान 49 हजार 520 रुपए मेहनताना बना है।

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क्या हुआ अब तक
बता दें, सीबीआई की अदालत ने तलवार दंपति को हत्या का आरोपी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर किए जाने का फैसला सुनाया था। वहीं, पिछले सप्ताह 12 अक्टूबर 2017 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरुषि-हेमराज मर्डर केस में नूपुर और राजेश तलवार को कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि परिस्थितियां और सबूत उन्हें दोषी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, इस फैसले के बाद यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है कि आरुषि-हेमराज का हत्यारा कौन है?

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