ये कंपनी बंद करने जा रही अपनी दूरसंचार सेवायें, लंबे समय से चल रही घाटे में

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नई दिल्ली। टाटा ग्रुप जल्द ही अपनी दूरसंचार सेवाओं को बंद कर सकता है। एक आधिकारिक ट्वीट में टाटा ग्रुप ने भारत सरकार/डीओटी को ये सूचना दी है कि वो टाटा टेलीसर्विसेज (टाटा डोकोमो) को बंद करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेल्स मार्केटिंग टीम से 500 से 600 कर्मचारियों को हटाया गया है।

Tata Telecom Service Ready To Stop Tata Docomo :

टाटा टेलीसर्विसेज ग्रुप की पहली ऐसी कंपनी होगी, जिसे 149 सालों के इतिहास में बंद किया जा रहा है। टाटा ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफि‍सर सौरभी अग्रवाल और टाटा टेलीसर्विसेस के मैनेजिंग डायरेक्‍टर एन श्रीनाथ दोनों ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्‍यूनिकेशंस के अधिकारियों से मुलाकात की और अपने मौजूदा स्‍पेक्‍ट्रम को सरेंडर या बेचने के रास्‍तों पर चर्चा की।

बताते चलें कि टाटा टेलीसर्विसेज की स्‍थापना 1996 में लैंडलाइन ऑपरेशन के साथ की गई थी। कंपनी ने साल 2002 में सीडीएमए ऑपरेशन लॉन्‍च किया था। कंपनी सूत्रों की मानें तो टाटा की टेलीकॉम सेवा लंबे समय से घाटे में चल रही थी। इस यूनिट को बेचने में नाकाम रहने के बाद चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन अब इस कारोबार को समटने पर विचार कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ग्रुप की इस कंपनी पर 34,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। साथ ही कर्ज देने वाली संस्थाएं भी राशि वसूलने के लिए दबाव बना रही हैं। टाटा के दूरसंचार कारोबार का दायरा देशभर के 19 दूरसंचार सर्किल तक विस्तृत है। हालांकि उसके ग्राहकों की संख्या लगातार घट रही है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2017 तक उसके वायरलेस उपयोगकर्ताओं की संख्या घटकर 4.2 करोड़ रह गई जो जून में 4.37 करोड़ रही थी।

नई दिल्ली। टाटा ग्रुप जल्द ही अपनी दूरसंचार सेवाओं को बंद कर सकता है। एक आधिकारिक ट्वीट में टाटा ग्रुप ने भारत सरकार/डीओटी को ये सूचना दी है कि वो टाटा टेलीसर्विसेज (टाटा डोकोमो) को बंद करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेल्स मार्केटिंग टीम से 500 से 600 कर्मचारियों को हटाया गया है।टाटा टेलीसर्विसेज ग्रुप की पहली ऐसी कंपनी होगी, जिसे 149 सालों के इतिहास में बंद किया जा रहा है। टाटा ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफि‍सर सौरभी अग्रवाल और टाटा टेलीसर्विसेस के मैनेजिंग डायरेक्‍टर एन श्रीनाथ दोनों ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्‍यूनिकेशंस के अधिकारियों से मुलाकात की और अपने मौजूदा स्‍पेक्‍ट्रम को सरेंडर या बेचने के रास्‍तों पर चर्चा की।बताते चलें कि टाटा टेलीसर्विसेज की स्‍थापना 1996 में लैंडलाइन ऑपरेशन के साथ की गई थी। कंपनी ने साल 2002 में सीडीएमए ऑपरेशन लॉन्‍च किया था। कंपनी सूत्रों की मानें तो टाटा की टेलीकॉम सेवा लंबे समय से घाटे में चल रही थी। इस यूनिट को बेचने में नाकाम रहने के बाद चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन अब इस कारोबार को समटने पर विचार कर रहे हैं।मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ग्रुप की इस कंपनी पर 34,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। साथ ही कर्ज देने वाली संस्थाएं भी राशि वसूलने के लिए दबाव बना रही हैं। टाटा के दूरसंचार कारोबार का दायरा देशभर के 19 दूरसंचार सर्किल तक विस्तृत है। हालांकि उसके ग्राहकों की संख्या लगातार घट रही है।भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2017 तक उसके वायरलेस उपयोगकर्ताओं की संख्या घटकर 4.2 करोड़ रह गई जो जून में 4.37 करोड़ रही थी।