आतंकी मिंटू हमेशा से रहा है खालिस्तान का पक्षधर

चंडीगढ़। पंजाब के पटियाला जिले की नाभा जेल से फरार हुआ खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स का आतंकी हरमिंदर सिंह मिंटू शुरू से ही अलग सिख राष्ट्र का पक्षधर रहा है। पंजाब में आतंकवाद के समय में ही मिंटू तथा कुछ अन्य असामाजिक तत्वों ने वर्ष 1987 में अलग विचारधारा को मजबूत करते हुए आतंकी संगठन खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स का गठन किया था। इस फोर्स से जुड़े आतंकी शुरू से ही अलग सिख राष्ट्र के गठन की मांग को लेकर पंजाब में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देते रहे हैं।




पंजाब में आतंकवाद का दौर समाप्त होने के बाद से ही खुफिया एजेंसियां इस बात को लेकर एकमत थी कि अब पंजाब से खालिस्तानी लहर पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। कुछ गरमपंथी विचारधारा के लोग विदेशों में रहते हुए खालिस्तानी लहर का समर्थन जरूर कर रहे थे। पुलिस तथा खुफिया पुलिस के पास ऐसा कोई इनपुट नहीं था जिससे इस बात के संकेत मिलें कि पंजाब में इस समय खालिस्तानी विचारधारा के लोग सक्रिय हैं। आज नाभा जेल से हरमिंदर सिंह मिंटू व उसके साथियों की फरारी ने करीब एक दशक बाद इस बात के संकेत दे दिए हैं कि पंजाब में अभी भी खालिस्तानी विचाराधारा जिंदा है।

जेल से फरार हुए हरमिंदर सिंह मिंटू ने वर्ष 2008 के दौरान डेरासच्चा सौदा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह पर जानलेवा हमला किया था। इसके अलावा वर्ष 2010 में हलवारा स्टेशन से विस्फोटक पकड़े जाने के मामले में भी मिंटू पर ही आरोप था। यही नहीं मिंटू ने वर्ष 2011 में पंजाब में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बड़ा हमला करने की भी साजिश रची थी, जिसका पुलिस ने ऐन मौके पर भंडाफोड़ कर दिया था। आतंकी मिंटू को 8 नवंबर 2014 को दिल्ली के हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।



जेल में बंद होने के दौरान मिंटू के संदर्भ में खुफिया तंत्र की यही रिपोर्ट सार्वजनिक हो रही थी कि वह जेल की चारदीवारी से बाहर किसी के संपर्क में नहीं है और खालिस्तानी विचारधारा को लगभग त्याग चुका है। आज हुई घटना ने सभी तरह के इनपुट को झूठा साबित कर दिया है।