आतंकवादी संगठन अलकायदा का सीएए पर भारतीय मुसलमानों को भड़काने का नापाक मंसूबा

Terrorist organization
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वैश्विक आतंकवादी समूह अल-कायदा अरब पेनिन्सुला (एक्यूएपी) ने भारतीय मुसलमानों और समुदाय के विद्वानों से भारत के खिलाफ जिहाद में हाथ मिलाने की नापाक अपील की है। उसने सीएए का हवाला देकर मुसलमानों से कथित भेदभाव की बात कहते हुए हथियार उठाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने को कहा। हालांकि, आतंकवादी संगठन यह भूल गया कि उसके अलावा पाकिस्तान, और इस्लामिक स्टेट ने भी कई बार भारतीय मुसलमानों को उकसाने की कोशिश की, लेकिन उनके कट्टर और हिंसक विचारों को हर बार यहां खारिज किया गया।

Terrorist Organization Al Qaeda Plans To Provoke Indian Muslims On Caa :

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहा है कि अलकायदा के मिडिल ईस्ट विंग का यह बयान वैश्विक आतंकवादी समूह और पाकिस्तान के इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के बीच तालमेल को उजागर करता है, जो भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव का नैरेटिव बनाना चाहते हैं।

आतंकवादी समूह ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का जिक्र किया है, जो तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए गए छह समुदायों के लोगों को आसानी से नागरिकता प्रदान करने के लिए लाया गया है। इस कानून को 5 महीने पहले दिसंबर 2019 में संसद से पास किया गया था।

सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीएए का संदर्भ लेकर वैश्विक आतंकवादी समूह भारत के खिलाफ पाकिस्तान के सोशल मीडिया अभियान को समर्थन देने के अलावा मुस्लिम बाहुल्य वाले खाड़ी देशों के साथ भारत का रिश्ता खराब करना चाहता है और भारतीय मुसलमानों को भड़काना चाहता है।

अधिकारी ने कहा, ”हम शुरुआत से सोशल मीडिया कैंपने को ट्रैक कर रहे हैं और 2,794 ट्विटर हैंडल्स की पहचान की है जिन्होंने इस सूचना युद्ध में सबसे अधिक सक्रिय भूमिका निभाई है। मस्लिम अधिकारी को लेकर भारत और भारत सरकार के खिलाफ हर हैशटैग को हम ट्रेस करने में सफल रहे हैं और इनमें से सभी हमें पाकिस्तान के अकाउंट तक ले जाता है।” अधिकारी ने कहा, ”भारत के कुछ अच्छे लोग भी इस कैंपेन में फंस जाते हैं जिस तरह गल्फ के लोग झांसे में आ जाते हैं, उन्हें बड़ी तस्वीर का अहसास नहीं होता है।”

एक इंटेलिजेंस अधिकारी ने कहा कि अल कायदा का आईएसआई की कोशिश में शामिल होना वैश्विक जिहाद के लिए वह नैरेटिव बनाने की कोशिश है जिसके लिए कई सालों से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कोशिश करते रहे और फिर यह जिम्मेदारी आईएसआई ने ली।

वैश्विक आतंकवादी समूह अल-कायदा अरब पेनिन्सुला (एक्यूएपी) ने भारतीय मुसलमानों और समुदाय के विद्वानों से भारत के खिलाफ जिहाद में हाथ मिलाने की नापाक अपील की है। उसने सीएए का हवाला देकर मुसलमानों से कथित भेदभाव की बात कहते हुए हथियार उठाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने को कहा। हालांकि, आतंकवादी संगठन यह भूल गया कि उसके अलावा पाकिस्तान, और इस्लामिक स्टेट ने भी कई बार भारतीय मुसलमानों को उकसाने की कोशिश की, लेकिन उनके कट्टर और हिंसक विचारों को हर बार यहां खारिज किया गया। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहा है कि अलकायदा के मिडिल ईस्ट विंग का यह बयान वैश्विक आतंकवादी समूह और पाकिस्तान के इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के बीच तालमेल को उजागर करता है, जो भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव का नैरेटिव बनाना चाहते हैं। आतंकवादी समूह ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का जिक्र किया है, जो तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए गए छह समुदायों के लोगों को आसानी से नागरिकता प्रदान करने के लिए लाया गया है। इस कानून को 5 महीने पहले दिसंबर 2019 में संसद से पास किया गया था। सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीएए का संदर्भ लेकर वैश्विक आतंकवादी समूह भारत के खिलाफ पाकिस्तान के सोशल मीडिया अभियान को समर्थन देने के अलावा मुस्लिम बाहुल्य वाले खाड़ी देशों के साथ भारत का रिश्ता खराब करना चाहता है और भारतीय मुसलमानों को भड़काना चाहता है। अधिकारी ने कहा, ''हम शुरुआत से सोशल मीडिया कैंपने को ट्रैक कर रहे हैं और 2,794 ट्विटर हैंडल्स की पहचान की है जिन्होंने इस सूचना युद्ध में सबसे अधिक सक्रिय भूमिका निभाई है। मस्लिम अधिकारी को लेकर भारत और भारत सरकार के खिलाफ हर हैशटैग को हम ट्रेस करने में सफल रहे हैं और इनमें से सभी हमें पाकिस्तान के अकाउंट तक ले जाता है।'' अधिकारी ने कहा, ''भारत के कुछ अच्छे लोग भी इस कैंपेन में फंस जाते हैं जिस तरह गल्फ के लोग झांसे में आ जाते हैं, उन्हें बड़ी तस्वीर का अहसास नहीं होता है।'' एक इंटेलिजेंस अधिकारी ने कहा कि अल कायदा का आईएसआई की कोशिश में शामिल होना वैश्विक जिहाद के लिए वह नैरेटिव बनाने की कोशिश है जिसके लिए कई सालों से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कोशिश करते रहे और फिर यह जिम्मेदारी आईएसआई ने ली।