योगी सरकार की बड़ी उपलब्धी, अंग्रेजी वर्णमाला में छाप डाले 31 अक्षर

Alphabet
योगी सरकार की बड़ी उपलब्धी, अंग्रेजी वर्णमाला में छाप डाले 31 अक्षर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के परिषदीय प्राइमरी स्कूलों में नौनिहालों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। यहां बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए मिलने वाली किताबों में अंग्रेजी की वर्णमाला 31 अक्षरों वाली है, जबकि दुनिया अब तक 26 अक्षर ही पढ़ती आई। चौकाने वाली बात ये है कि ये किताबें यूपी सरकार नि:शुल्क मुहैया करवाती है, जिसके लिए करोड़ों रूपए हर साल खर्च किए जाते हैं।

Text Book Published By Uttar Pradesh Government Teaches 31 Letters Of English Alphabet :

ये किताबें उत्तर प्रदेश के एक प्राइमरी स्कूल में प्रथम कक्षा के छात्रों के लिए छापी गईं हैं। जिन्हें अंग्रेजी का पहला पाठ अंग्रेजी वर्णमाला यानी ABCD सिखाई जाती है।

आम स्कूलों के बच्चों को अंग्रेजी के 26 अक्षर सिखाए जाते हैं, लेकिन यूपी सरकार के शिक्षा वैज्ञानिकों ने प्राइमरी स्कूलों के लिए जिस अंग्रेजी वर्णमाला की खोज की है उसमें 31 अक्षर रखे गए हैं। जिन्हें बच्चे भी आंख मूंद कर रटने में लगे हुए हैं।

किताबों की गलती तो समझ भी आती है लेकिन हम जिस स्कूल में पहुंचे वहां के मास्टर जी अपने छात्रों और उनकी किताबों से दूर मोबाइल में व्यस्त दिखे। तो बच्चे मास्टर जी की रटाई वर्णमाला को सहत्रुटि दोहराए जा रहे थे। जिसकी वजह थी मास्टर जी ने अपनी कलम से गलती से दो बार छप गए अक्षरों को कटवाने तक की जहमत नहीं उठाई।

जब मास्टर जी से पूछा गया कि किताबें गलत हैं और बच्चे गलत रट्टा लगा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि चार महीने पहले ही ये किताबें आईं थी। विभागीय अधिकारियों को गलती के बारे में बताया गया, लेकिन अभी तक किताबें बदली नहीं जा सकीं हैं।

इस सिलसिले में फिरोजाबाद के बेसिक शिक्षा अधिकारी से भी बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बात की जानकारी उन्हें है। किताब को सही करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है किताबे बदली नहीं जाएंगी। इनमें करेक्शन करवाया जाएगा।

अब सवाल उठता है कि जुलाई में मिलने वाली किताबें पहले ही देर से बच्चों को मिल पातीं हैं। देर से आई किताबो में भी गलती हो, तो आखिर वे बदली कब जाएंगी। जब हमें ही यह खबर नवंबर में लगी तो, अब सरकार से क्या उम्मीद की जाए।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के परिषदीय प्राइमरी स्कूलों में नौनिहालों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। यहां बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए मिलने वाली किताबों में अंग्रेजी की वर्णमाला 31 अक्षरों वाली है, जबकि दुनिया अब तक 26 अक्षर ही पढ़ती आई। चौकाने वाली बात ये है कि ये किताबें यूपी सरकार नि:शुल्क मुहैया करवाती है, जिसके लिए करोड़ों रूपए हर साल खर्च किए जाते हैं।ये किताबें उत्तर प्रदेश के एक प्राइमरी स्कूल में प्रथम कक्षा के छात्रों के लिए छापी गईं हैं। जिन्हें अंग्रेजी का पहला पाठ अंग्रेजी वर्णमाला यानी ABCD सिखाई जाती है।आम स्कूलों के बच्चों को अंग्रेजी के 26 अक्षर सिखाए जाते हैं, लेकिन यूपी सरकार के शिक्षा वैज्ञानिकों ने प्राइमरी स्कूलों के लिए जिस अंग्रेजी वर्णमाला की खोज की है उसमें 31 अक्षर रखे गए हैं। जिन्हें बच्चे भी आंख मूंद कर रटने में लगे हुए हैं।किताबों की गलती तो समझ भी आती है लेकिन हम जिस स्कूल में पहुंचे वहां के मास्टर जी अपने छात्रों और उनकी किताबों से दूर मोबाइल में व्यस्त दिखे। तो बच्चे मास्टर जी की रटाई वर्णमाला को सहत्रुटि दोहराए जा रहे थे। जिसकी वजह थी मास्टर जी ने अपनी कलम से गलती से दो बार छप गए अक्षरों को कटवाने तक की जहमत नहीं उठाई।जब मास्टर जी से पूछा गया कि किताबें गलत हैं और बच्चे गलत रट्टा लगा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि चार महीने पहले ही ये किताबें आईं थी। विभागीय अधिकारियों को गलती के बारे में बताया गया, लेकिन अभी तक किताबें बदली नहीं जा सकीं हैं।इस सिलसिले में फिरोजाबाद के बेसिक शिक्षा अधिकारी से भी बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बात की जानकारी उन्हें है। किताब को सही करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है किताबे बदली नहीं जाएंगी। इनमें करेक्शन करवाया जाएगा।अब सवाल उठता है कि जुलाई में मिलने वाली किताबें पहले ही देर से बच्चों को मिल पातीं हैं। देर से आई किताबो में भी गलती हो, तो आखिर वे बदली कब जाएंगी। जब हमें ही यह खबर नवंबर में लगी तो, अब सरकार से क्या उम्मीद की जाए।