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महाभारत के युद्ध में मारे जाने वाले एक भी योद्धा का शव नही मिला कुरूक्षेत्र, जानिए क्यों?

कुरूक्षेत्र के युद्ध में हजारों योद्धाओं ने अपने प्राण गवाएं थे, ऐसा कहा जाता है कि इन योद्धाओं के खून से आज भी कुरूक्षेत्र की मिट्टी का रंग लाल है। लेकिन क्या आप जानते है हजारों की संख्या में मरने वाले इन योद्धओं के शवों का क्या हुआ होगा?

By आराधना शर्मा 
Updated Date

The Body Of A Single Warrior Who Was Killed In The War Of Mahabharata Was Not Found In Kurukshetra Know Why

नई दिल्ली: महाभारत का युद्ध आज से हजारों साल पहले कौरवों और पांडवों के बीच लड़ा गया था। कुरूक्षेत्र के युद्ध में हजारों योद्धाओं ने अपने प्राण गवाएं थे, ऐसा कहा जाता है कि इन योद्धाओं के खून से आज भी कुरूक्षेत्र की मिट्टी का रंग लाल है। लेकिन क्या आप जानते है हजारों की संख्या में मरने वाले इन योद्धओं के शवों का क्या हुआ होगा क्योंकि आज तक खुदाई में या किसी भी तरह से उस जगह पर किसी कंकाल के होने की खबर नही मिली है। और ना ही इतिहास में उस जगह पर किसी भी तरह के शवों के होने की जानकारी मिली है।

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हालांकि ये बात हजारों साल पहले की है लेकिन जब लाखों साल पहले धरती पर हुए डायनासोर के कंकाल मिल सकते है तो कुरूक्षेत्र के युद्ध में मरने वाले हजारों योद्धाओं के कंकाल क्यों नही।

दरअसल ऐसा माना जाता है कि महाभारत काल के समय युद्ध में मरने वाले सभी योद्धाओं का अंतिम संस्कार किया जाता था शायद इसलिए आज तक कुरूक्षेत्र के युद्ध में मरने वाले किसी भी योद्धा का शव या अस्थियां मिलने की खबर नही है। यहां पर हम कुछ फैक्ट बताने जा रहे है जो बताते है कि कुरूक्षेत्र के युद्ध में मरने वाले योद्धाओं का बाद में क्या हुआ था।

शाम ढलते ही रोक दिया जाता था युद्ध

ऐसा कहा जाता है कि महाभारत का युद्ध सिर्फ दिन में ही लड़ा जाता था और शाम ढलते ही युद्ध रोक दिया जाता था। कुरूक्षेत्र के युद्ध में मारे गये योद्धाओं के शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाता था। कुरूक्षेत्र के इतिहास पर रिसर्च कर चुके अमल नंदन का कहना है कि उत्तरायन के दिन जब भीष्म पितामह ने अंतिम सांस ली तो उस दिन कुरूक्षेत्र के युद्ध के समाप्त होने की घोषणा भी की गई थी। उस दिन कुरूक्षेत्र की भूमि को भी जला दिया गया था ताकि कुरूक्षेत्र के युद्ध में मारे गये योद्धाओं को स्वर्ग में जगह मिले। जलने के बाद उस मिट्टी से युद्ध के सभी निशान भी मिट गये।

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