भारत के लिए खुशखबरी, ईरान के चाबहार बंदरगाह पर नहीं होगा अमेरिकी प्रतिबंधों का असर

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भारत के लिए खुशखबरी, ईरान के चाबहार बंदरगाह पर नहीं होगा अमेरिकी प्रतिबंधों का असर

नई दिल्ली। यूएई के ईरान में भारत सरकार द्वारा बनाए जा रहे चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट पर अमेरिका के प्रतिबंधों का कोई असर नहीं होगा। अमेरिकी सरकार ने बीते सोमवार को फैसला किया था कि ईरान से तेल आयात करने वाले देशों को प्रतिबंधों से कोई छूट नहीं दी जाएगी। इस साल मई में भारत समेत 8 देशों को प्रतिबंधों में मिली छूट की सीमा खत्म हो रही है। अमेरिकी सरकार में एक अधिकारी का कहना है कि चाबहार प्रोजेक्ट अलग है और उस पर प्रतिबंधों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस बंदरगाह को भारत और ईरान ने मिलकर विकसित किया है।

The Good News For India The Impact Of Us Sanctions Will Not Be At Chabahar Port Of Iran :

दरअसल, अमेरिकी प्रशासन का यह फैसला दर्शाता है कि ओमान की खाड़ी में विकसित किए जा रहे इस बंदरगाह में भारत की भूमिका को अमेरिका मान्यता देता है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और छूट देने में उसका रुख बेहद सख्त है। यह बंदरगाह युद्ध ग्रस्त अफगानिस्तान के विकास के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘प्रतिबंधों में छूट इसलिए दी गई है ताकि चाबहार बंदरगाह का विकास हो सके। साथ ही रेलवे का निर्माण हो सके, जिससे सामान अफगानिस्तान तक पहुंचाया जा सके। अफगानिस्तान के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को भी प्रतिबंधों से मुक्त किया जा रहा था’

बता दें, भारत के पश्चिमी तट से चाबहार बंदरगाह आसानी से पहुंचा जा सकेगा। इसे ग्वादर (पाक) की तुलना में भारत के रणनीतिक पोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। ग्वादर को बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के तहत चीन विकसित कर रहा है। चाबहार से अफगानिस्तान को रेलमार्ग से जोड़ा जाएगा। अमेरिका ने पिछले साल भी पोर्ट पर विकास को लेकर भारत को कुछ खास प्रतिबंधों से छूट दी थी।

यही नहीं सऊदी अरेबिया ने कहा है कि ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध की छूट की समय सीमा खत्म होने के बाद क्या करना है, यह अभी तय नहीं है। फिलहाल, ऑइल आउटपुट को बढ़ाने के लिए कोई प्लान नहीं है। भारत द्वारा किए गए आर्थिक मदद से तैयार ईरान का चाबहार पोर्ट अब पूरी तरह से काम करने लगा है। इसके निर्माण में 34 करोड़ डॉलर का खर्च आया था। चाबहार का विकास और पुनर्निमाण रेवॉल्यूशनरी गार्ड से संबद्ध कंपनी खातम अलअनबिया ने किया है। हालांकि इसके निर्माण में कई भारतीय सरकारी कंपनियां भी शामिल थीं।

नई दिल्ली। यूएई के ईरान में भारत सरकार द्वारा बनाए जा रहे चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट पर अमेरिका के प्रतिबंधों का कोई असर नहीं होगा। अमेरिकी सरकार ने बीते सोमवार को फैसला किया था कि ईरान से तेल आयात करने वाले देशों को प्रतिबंधों से कोई छूट नहीं दी जाएगी। इस साल मई में भारत समेत 8 देशों को प्रतिबंधों में मिली छूट की सीमा खत्म हो रही है। अमेरिकी सरकार में एक अधिकारी का कहना है कि चाबहार प्रोजेक्ट अलग है और उस पर प्रतिबंधों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस बंदरगाह को भारत और ईरान ने मिलकर विकसित किया है। दरअसल, अमेरिकी प्रशासन का यह फैसला दर्शाता है कि ओमान की खाड़ी में विकसित किए जा रहे इस बंदरगाह में भारत की भूमिका को अमेरिका मान्यता देता है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और छूट देने में उसका रुख बेहद सख्त है। यह बंदरगाह युद्ध ग्रस्त अफगानिस्तान के विकास के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'प्रतिबंधों में छूट इसलिए दी गई है ताकि चाबहार बंदरगाह का विकास हो सके। साथ ही रेलवे का निर्माण हो सके, जिससे सामान अफगानिस्तान तक पहुंचाया जा सके। अफगानिस्तान के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को भी प्रतिबंधों से मुक्त किया जा रहा था' बता दें, भारत के पश्चिमी तट से चाबहार बंदरगाह आसानी से पहुंचा जा सकेगा। इसे ग्वादर (पाक) की तुलना में भारत के रणनीतिक पोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। ग्वादर को बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के तहत चीन विकसित कर रहा है। चाबहार से अफगानिस्तान को रेलमार्ग से जोड़ा जाएगा। अमेरिका ने पिछले साल भी पोर्ट पर विकास को लेकर भारत को कुछ खास प्रतिबंधों से छूट दी थी। यही नहीं सऊदी अरेबिया ने कहा है कि ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध की छूट की समय सीमा खत्म होने के बाद क्या करना है, यह अभी तय नहीं है। फिलहाल, ऑइल आउटपुट को बढ़ाने के लिए कोई प्लान नहीं है। भारत द्वारा किए गए आर्थिक मदद से तैयार ईरान का चाबहार पोर्ट अब पूरी तरह से काम करने लगा है। इसके निर्माण में 34 करोड़ डॉलर का खर्च आया था। चाबहार का विकास और पुनर्निमाण रेवॉल्यूशनरी गार्ड से संबद्ध कंपनी खातम अलअनबिया ने किया है। हालांकि इसके निर्माण में कई भारतीय सरकारी कंपनियां भी शामिल थीं।