स्वच्छ भारत मिशन : विभाग ने ​दे दिया करोड़ो रूपए का अनुदान, पर किसको मिला ये पता ही नहीं

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स्वच्छ भारत मिशन : विभाग ने ​दे दिया करोड़ो रूपए का अनुदान, पर किसको मिला ये पता ही नहीं

लखनऊ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने पूरे उत्तर प्रदेश में लाखों लोगों को व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के लिए करोड़ो रूपए का भुगतान कर दिया। अब यहीं उसके गले की फांस बन गई है। दरअसल शौचालयों के लिए करोड़ों रूपए अनुदान तो जारी कर दिया गया, लेकिन लाभार्थियों की जानकारी शासन को भेजी ही नहीं गई है। बताया जा रहा है कि एक लाख से अधिक आधार नंबर लाभार्थियों के नाम से मेल नहीं खा रहे हैं।

The Grant Of Millions Of Rupees Given By The Department But It Is Not Known Who Got It :

ये मामला सामने आने के बाद अब सरकार ने सभी शहरी निकायों से अनुदान पाने वालों के आधार की सीडिंग करवाने के लिए भी कहा है। जिससे कि इस बात का पता चल सके कि अनुदान की रकम सही लोगों को दी गई है, अथवा नहीं।
बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत सभी क्षेत्रों में सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया जा रहा है। हाल ही में विभाग ने कुल बने 8,93,150 शौचालयों के डेटा का आकलन किया। इसमें पता चला कि 1.36 लाख से ज्यादा शौचालयों के लिए अनुदान तो जारी किया गया, लेकिन अनुदान पाने वाले का आधार नगर विकास विभाग के पास हैं ही नहीं।

बता दें कि इस मामले को लेकर एक समीक्षा बैठक भी की गई थी। जिसमें जो तथ्य सामने आए उनसे व्यक्तिगत शौचालयों के लिए जारी अनुदान के 27 फीसदी से ज्यादा डेटा पर सवाल खड़ा हो गया है। इसकी मुख्य वजह ये है कि व्यक्तिगत शौचालय के लिए अनुदान पाने वाले लोगों की पुष्टि के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया था। फिर आधार की सत्यता के लिए इसकी पुष्टि के लिए इन्हें सीड करवाया जाना था। फिलहाल इस मामले में नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि हमारी प्राथमिकता स्वच्छता को लेकर है। अब तक चार सौ से ज्यादा शहरी निकाय ओडीएफ घोषित हो चुके हैं। बाकी निकायों को भी खुद को ओडीएफ घोषित करने के बाद केन्द्र को सूचना भेजने को कहा गया है।

लखनऊ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने पूरे उत्तर प्रदेश में लाखों लोगों को व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के लिए करोड़ो रूपए का भुगतान कर दिया। अब यहीं उसके गले की फांस बन गई है। दरअसल शौचालयों के लिए करोड़ों रूपए अनुदान तो जारी कर दिया गया, लेकिन लाभार्थियों की जानकारी शासन को भेजी ही नहीं गई है। बताया जा रहा है कि एक लाख से अधिक आधार नंबर लाभार्थियों के नाम से मेल नहीं खा रहे हैं। ये मामला सामने आने के बाद अब सरकार ने सभी शहरी निकायों से अनुदान पाने वालों के आधार की सीडिंग करवाने के लिए भी कहा है। जिससे कि इस बात का पता चल सके कि अनुदान की रकम सही लोगों को दी गई है, अथवा नहीं। बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत सभी क्षेत्रों में सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया जा रहा है। हाल ही में विभाग ने कुल बने 8,93,150 शौचालयों के डेटा का आकलन किया। इसमें पता चला कि 1.36 लाख से ज्यादा शौचालयों के लिए अनुदान तो जारी किया गया, लेकिन अनुदान पाने वाले का आधार नगर विकास विभाग के पास हैं ही नहीं। बता दें कि इस मामले को लेकर एक समीक्षा बैठक भी की गई थी। जिसमें जो तथ्य सामने आए उनसे व्यक्तिगत शौचालयों के लिए जारी अनुदान के 27 फीसदी से ज्यादा डेटा पर सवाल खड़ा हो गया है। इसकी मुख्य वजह ये है कि व्यक्तिगत शौचालय के लिए अनुदान पाने वाले लोगों की पुष्टि के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया था। फिर आधार की सत्यता के लिए इसकी पुष्टि के लिए इन्हें सीड करवाया जाना था। फिलहाल इस मामले में नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि हमारी प्राथमिकता स्वच्छता को लेकर है। अब तक चार सौ से ज्यादा शहरी निकाय ओडीएफ घोषित हो चुके हैं। बाकी निकायों को भी खुद को ओडीएफ घोषित करने के बाद केन्द्र को सूचना भेजने को कहा गया है।