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इस मंदिर के खंभों से निकलती है संगीत की धुन, पांडवों से है नाता

The Melody Of The Music Emanates From The Pillars Of This Temple Is Related To The Pandavas

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: दक्षिण भारत के कई शहरों में मंदिर भरे पड़े हैं। सबसे खास बात यह है कि दक्षिण भारत में कई प्राचीन मंदिरों से जुड़े रहस्य हमेशा लोगों को हैरान करते रहते हैं। इन प्राचीन मंदिरों के बारे में हमेशा ही कुछ-न-कुछ अनोखा सुनने के लिए मिलता रहता है। इसी तरह का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में स्थित है, जो कि नेल्लईअप्पार मंदिर के नाम से प्रख्यात है।

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भगवान भोलेनाथ की एक प्रतिमा इस मंदिर में विद्यमान है, जिसका निर्माण 700 ईस्वी में किया गया था। अपनी खूबसूरती के लिए तमिलनाडु का यह मंदिर दुनियाभर में प्रख्यात है। संगीत स्तंभ भी इस मंदिर को कहा जाता है। इसके पीछे की वजह यह है कि इस मंदिर के खंभों से आप चाहें तो मधुर संगीत की धुन आराम से निकाल सकते हैं। सातवीं शताब्दी में तिरुनेलवेली के इस मंदिर का निर्माण किया गया था। ऐसी मान्यता है कि पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण किया था। मंदिर का फैलाव 14 एकड़ के क्षेत्रफल में है। इसके मुख्य द्वार की लंबाई 850 फीट और चौड़ाई 756 फीट की है। सातवीं शताब्दी के श्रेष्ठ शिल्पकारों में से एक निंदरेसर नेदुमारन ने संगीत खंभों का निर्माण किया था, ऐसा कहा जाता है।

मंदिर में जो खंभे बने हैं, उनसे मधुर धुन बाहर आती है। यही वजह है कि श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल बना रहता है। घंटी जैसी मधुर ध्वनि इन खंभों से निकलती हुई सुनने को मिलती है। सात रंग के संगीत की धुन आप भी चाहें तो इन मंदिर के खंभों से निकाल सकते हैं। वास्तुकला इस मंदिर की बड़ी ही लाजवाब व अद्भुत है। यहां 48 खंभे एक ही पत्थर को तराश कर बना दिए गए हैं। मुख्य खंभे को इन सभी 48 खंभों ने घेर रखा है। मंदिर में उन खंभों की संख्या 161 है, जिनसे संगीत की धुन बाहर आती है। हैरान करने वाली बात यह है कि यदि आप एक खंभे से ध्वनि निकालने का प्रयास करते हैं तो यहां बाकी खंभों में भी कंपन उत्पन्न होने लगता है। खंभों से बाहर आती ध्वनि का रहस्य पता लगाने के लिए अब तक इस पर कई शोध भी किए जा चुके हैं।

अभी तक जो कई शोध हुए हैं, उनमें से एक शोध की मानें तो इस मंदिर में पत्थर के जो खंभे बने हुए हैं, वे तीन श्रेणियों में बटे हुए हैं। इनमें से पहली श्रेणी को श्रुति स्तंभ कहते हैं। दूसरी श्रेणी गण थूंगल के नाम से जानी जाती है। वहीं, तीसरी श्रेणी लया थूंगल की है। शोध में बताया गया है कि श्रुति स्तंभ और लया थूंगल के बीच दरअसल पारस्परिक संबंध बना हुआ है। यही वजह है कि जब श्रुति स्तंभ पर कोई टैप करता है तो लया थूंगल से भी आवाज बाहर आनी शुरू हो जाती है। ठीक उसी प्रकार से जब कोई लया थूंगल पर टैप करता है तो ऐसे में श्रुति स्तंभ से भी ध्वनि का बाहर निकलना शुरू हो जाता है।

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