मस्जिद के लिए मिली जमीन से मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे पक्षकार

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मस्जिद के लिए मिली जमीन से मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे पक्षकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मस्जिद के लिए राज्य सरकार की ओर से अलॉट की गई पांच एकड़ भूमि से मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के मुताबिक मस्जिद निर्माण के लिए भूमि उपयुक्त जगह पर नहीं दी गई है। वहां अयोध्या के लोग नमाज पढ़ने नहीं जा सकते। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अब राज्य सरकार के आवंटन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

The Muslim Side Is Not Satisfied With The Land Given For The Mosque The Parties Will Go To The Supreme Court :

बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी से करेंगे चर्चा

अयोध्या में मुस्लिमों का कहना है कि शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर मस्जिद का कोई मतलब नहीं है। अयोध्या मामले में एक प्रमुख याचिकाकर्ता हाजी महबूब ने कहा, ‘इतनी दूर जगह देने का क्या मतलब है। हमने कहा था कि हमें जमीन नहीं चाहिए और अगर जमीन आवंटित की जाती है तो वह अयोध्या के पास होनी चाहिए। मैं इसे स्वीकार नहीं करता।’ उनका कहना था कि वह बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

शहर से दूर होने पर जताई नाराजगी

अयोध्या के बहुत से अन्य लोगों ने भी मस्जिद का स्थान शहर से दूर होने पर नाराजगी जताई। एक अन्य याचिकाकर्ता इकबाल अंसारी ने कहा कि उनसे संपर्क नहीं किया गया था लेकिन वह अपने घर के निकट जमीन का इस्तेमाल करने के पुराने प्रस्ताव पर बरकरार हैं। इस जमीन पर पहले से एक मस्जिद है और इसे बेहतर किया जा सकता है। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, ‘अयोध्या में काफी जमीन और मस्जिदें हैं। लोग अपने घर के निकट की मस्जिद में जाते हैं। वैसे घर पर भी नमाज पढ़ी जा सकती है। अगर जमीन 67 एकड़ के अंदर होती तो उसे स्वीकार किया जाता।’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मस्जिद के लिए राज्य सरकार की ओर से अलॉट की गई पांच एकड़ भूमि से मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के मुताबिक मस्जिद निर्माण के लिए भूमि उपयुक्त जगह पर नहीं दी गई है। वहां अयोध्या के लोग नमाज पढ़ने नहीं जा सकते। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अब राज्य सरकार के आवंटन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी से करेंगे चर्चा अयोध्या में मुस्लिमों का कहना है कि शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर मस्जिद का कोई मतलब नहीं है। अयोध्या मामले में एक प्रमुख याचिकाकर्ता हाजी महबूब ने कहा, 'इतनी दूर जगह देने का क्या मतलब है। हमने कहा था कि हमें जमीन नहीं चाहिए और अगर जमीन आवंटित की जाती है तो वह अयोध्या के पास होनी चाहिए। मैं इसे स्वीकार नहीं करता।' उनका कहना था कि वह बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। शहर से दूर होने पर जताई नाराजगी अयोध्या के बहुत से अन्य लोगों ने भी मस्जिद का स्थान शहर से दूर होने पर नाराजगी जताई। एक अन्य याचिकाकर्ता इकबाल अंसारी ने कहा कि उनसे संपर्क नहीं किया गया था लेकिन वह अपने घर के निकट जमीन का इस्तेमाल करने के पुराने प्रस्ताव पर बरकरार हैं। इस जमीन पर पहले से एक मस्जिद है और इसे बेहतर किया जा सकता है। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, 'अयोध्या में काफी जमीन और मस्जिदें हैं। लोग अपने घर के निकट की मस्जिद में जाते हैं। वैसे घर पर भी नमाज पढ़ी जा सकती है। अगर जमीन 67 एकड़ के अंदर होती तो उसे स्वीकार किया जाता।'