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नहीं बदलेगा इलाहाबाद हाइकोर्ट का नाम, ये है वजह

By आशीष यादव 
Updated Date

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया, लेकिन हाईकोर्ट का नाम इलाहाबाद हाईकोर्ट ही रहेगा। कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ने बताया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का नाम बदलने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। बता दें कि इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के बाद हाईकोर्ट में एक पीआईएल भी दायर की गई, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल डाली गई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया था।

सरकार 2016 में बंबई, मद्रास और कलकत्ता हाईकोर्ट का नाम बदलने के लिए एक बिल लाई थी, लेकिन संबंद्धित हाईकोर्ट और राज्यों की आपत्तियों के बाद यह संसद में नहीं रखा जा सका। बता दें कि हाइकोर्ट का नाम बदलने के लिए राज्य का प्रस्ताव और उच्च न्यायालयों की संस्तुति आवश्यक है। 1995 बंबई का नाम बदलकर मुंबई और 1996 में मद्रास का नाम बदलकर चेन्नई कर दिया गया। वहीं 2001 में कलकत्ता का नाम बदलकर कोलकाता कर दिया गया था। हालाकि इसके बाद भी इनके उच्चन्यायालयों का नामद बदलने का सरकार ने प्रयास किया था।

बता दें कि बंबई, कलकत्ता, मद्रास और इलाहाबाद हाईकोर्ट (1869) ब्रिटिश संसद द्वारा पारित इंडियन हाईकोर्ट ऐक्ट, 1861 के तहत इंग्लैंड की महारानी द्वारा जारी लेटर पेटेंट पर स्थापित किए गए थे। हालाकि देश के आजाद होने के बाद भी ये हाइकोर्ट बने रहे और संविधान के अनुच्छेद 225 के तहत अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

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