हाल-ए-रेलवे : अधिकारियों ने नौ महीने में शाहखर्ची के नाम पर खर्च कर दिए तीस करोड़

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हाल-ए-रेलवे : अधिकारियों ने नौ महीने में शाहखर्ची के नाम पर खर्च कर दिए तीस करोड़

लखनऊ। रेलवे अधिकारियों की शाहखर्ची का आलम ये है कि इन लोगों ने बीते नौ महीने में तीस करोड़ रूपए खर्च ​कर दिए। जनता का ये पैसा इन अधिकारियों ने सैलून के नाम पर उड़ा दिया। अब सोंचने वाली बात ये है कि अगर ये अधिकारी सैलून की जगह हवाई जहाज से यात्रा करते तो इससे कहीं कम पैसों में काम चल जाता है, हालाकि इन लोगों ने सैलून के मोह में ऐसा नहीं किया।

The Officials Spent Thirty Crores In The Name Of Shahkharchi In Nine Months :

बता दें कि जहां एक तरफ ट्रेनों में सीटों की मारामारी है। जनता वेटिंग में यात्रा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ से मनबढ़ अधिकारी सैलून का प्रयोग कर रहे हैं। बताते चले कि रेल मत्री और चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने सैलून के प्रयोग के लिए कई बार हिदायत भी दी हैं, फिर भी उनकी आदेशों का कोई भी अधिकारी पालन नहीं कर रहा। यहां तक कहा गया कि सैलून की जगह हवाई जहाज से सफर करें।

आंकड़ो की बात करें तो अकेले लखनऊ की ही बात करें तो वर्ष 2019 में जनवरी से सितंबर के बीच कुल 992 बार सैलूनों का इस्तेमाल इन अधिकारियों ने किया। इसमें उत्तर रेलवे के चारबाग स्टेशन पर इस दौरान 344 सैलून आए हैं, जबकि 348 सैलून से अधिकारियों ने यहां से मूवमेंट किया है। यानी कुल 692 बार सैलूनों का इस्तेमाल हुआ है।

वहीं लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर जनवरी से सितंबर के बीच 300 से अधिक बार सैलून इस्तेमाल किए गए हैं। इस लिहाज से दोनों स्टेशनों पर कुल 992 से ज्यादा बार सैलूनों में अधिकारियों ने यात्राएं कीं। रेलवे विशेषज्ञों की मानें तो एक सैलून पर करीब तीन लाख रुपये का खर्च आता है। इस लिहाज से रेलवे अधिकारियों ने नौ महीने में 992 बार यात्रा कर करीब 30 करोड़ रुपये फूंक दिए हैं।

गौरतलब हो कि इण्डियन रेलवे के पास मौजूदा वक्त करीब 400 सैलून हैं और लखनऊ में एसी एक्सप्रेस, पंजाब मेल, डुप्लीकेट पंजाब मेल, लखनऊ चंडीगढ़, गोरखपुर एलटीटी, राप्तीसागर सरीखी ट्रेनों में सैलून लगाए जाते हैं, जबकि पहले लखनऊ मेल व पुष्पक एक्सप्रेस में भी सैलून लगाए जाते थे।

ऐसे होते हैं रेलवे के सैलून

रेलवे सैलून ट्रैक पर दौड़ते होटल सरीखे होते हैं। इनमें अत्याधुनिक सुविधाएं होती हैं। रेलवे अधिकारी बताते हैं कि सैलून में ड्रॉइंग रूम, किचन, स्टाफ केबिन, बेडरूम, फ्रिज, माइक्रोवेव, आरओ प्यूरीफायर, टीवी, डाइनिंग टेबल, सोफा, कुर्सी, मेज, बर्तन वगैरह होते हैं। कुछ सैलूनों में छह बर्थ क्षमता वाले तीन कमरे होते हैं, जबकि चार बर्थ की क्षमता वाले कमरे अटैच बाथरूम के साथ होते हैं।

लखनऊ। रेलवे अधिकारियों की शाहखर्ची का आलम ये है कि इन लोगों ने बीते नौ महीने में तीस करोड़ रूपए खर्च ​कर दिए। जनता का ये पैसा इन अधिकारियों ने सैलून के नाम पर उड़ा दिया। अब सोंचने वाली बात ये है कि अगर ये अधिकारी सैलून की जगह हवाई जहाज से यात्रा करते तो इससे कहीं कम पैसों में काम चल जाता है, हालाकि इन लोगों ने सैलून के मोह में ऐसा नहीं किया। बता दें कि जहां एक तरफ ट्रेनों में सीटों की मारामारी है। जनता वेटिंग में यात्रा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ से मनबढ़ अधिकारी सैलून का प्रयोग कर रहे हैं। बताते चले कि रेल मत्री और चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने सैलून के प्रयोग के लिए कई बार हिदायत भी दी हैं, फिर भी उनकी आदेशों का कोई भी अधिकारी पालन नहीं कर रहा। यहां तक कहा गया कि सैलून की जगह हवाई जहाज से सफर करें। आंकड़ो की बात करें तो अकेले लखनऊ की ही बात करें तो वर्ष 2019 में जनवरी से सितंबर के बीच कुल 992 बार सैलूनों का इस्तेमाल इन अधिकारियों ने किया। इसमें उत्तर रेलवे के चारबाग स्टेशन पर इस दौरान 344 सैलून आए हैं, जबकि 348 सैलून से अधिकारियों ने यहां से मूवमेंट किया है। यानी कुल 692 बार सैलूनों का इस्तेमाल हुआ है। वहीं लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर जनवरी से सितंबर के बीच 300 से अधिक बार सैलून इस्तेमाल किए गए हैं। इस लिहाज से दोनों स्टेशनों पर कुल 992 से ज्यादा बार सैलूनों में अधिकारियों ने यात्राएं कीं। रेलवे विशेषज्ञों की मानें तो एक सैलून पर करीब तीन लाख रुपये का खर्च आता है। इस लिहाज से रेलवे अधिकारियों ने नौ महीने में 992 बार यात्रा कर करीब 30 करोड़ रुपये फूंक दिए हैं। गौरतलब हो कि इण्डियन रेलवे के पास मौजूदा वक्त करीब 400 सैलून हैं और लखनऊ में एसी एक्सप्रेस, पंजाब मेल, डुप्लीकेट पंजाब मेल, लखनऊ चंडीगढ़, गोरखपुर एलटीटी, राप्तीसागर सरीखी ट्रेनों में सैलून लगाए जाते हैं, जबकि पहले लखनऊ मेल व पुष्पक एक्सप्रेस में भी सैलून लगाए जाते थे।

ऐसे होते हैं रेलवे के सैलून

रेलवे सैलून ट्रैक पर दौड़ते होटल सरीखे होते हैं। इनमें अत्याधुनिक सुविधाएं होती हैं। रेलवे अधिकारी बताते हैं कि सैलून में ड्रॉइंग रूम, किचन, स्टाफ केबिन, बेडरूम, फ्रिज, माइक्रोवेव, आरओ प्यूरीफायर, टीवी, डाइनिंग टेबल, सोफा, कुर्सी, मेज, बर्तन वगैरह होते हैं। कुछ सैलूनों में छह बर्थ क्षमता वाले तीन कमरे होते हैं, जबकि चार बर्थ की क्षमता वाले कमरे अटैच बाथरूम के साथ होते हैं।