इस किले में छेड़छाड़ करने वाले खो देते हैं अपना मानसिक संतुलन

raisen fort
इस किले में छेड़छाड़ करने वाले खो देते हैं अपना मानसिक संतुलन

नई दिल्ली। दुनिया में आज भी ऐसे कई चमत्कारी चीजें मौजूद हैं, जिनके बारे में शायद किसी ने सुना हो। ऐसा ही एक चमत्कारी पत्थर है जिसे पारस पत्थर के नाम से जाना जाता है। जिसके बारे में आपने अक्सर कहानियों में और किस्सों में सुना होगा। वहीं, आज तक इस पत्थर को कोई खोज नहीं पाया है। आप ये जानकर जरूर हैरान रह जाएंगे कि एक किले में इसके होने का दावा किया जाता है। यही वजह है कि हर साल किले में लोग खुदाई करने पहुंच जाते हैं।

The People Who Tamper This Fort Lose Their Mental Balance :

दरअसल, इस पत्थर के बारे में कहा जाता है कि ये वो पत्थर है जिसे छूते ही लोहा भी सोना बन जाता है। माना जाता है कि भोपाल से 50 किलोमीटर दूर रायसेन के किले में यह पत्थर मौजूद है। साथ ही ये भी माना जाता है कि इस किले के राजा के पास पारस पत्थर मौजूद था।

इतना ही नहीं इस पत्थर के लिए कई बार युद्ध हुए, लेकिन जब इस किले के राजा को लगा कि वह युद्ध हार जाएंगे तो उन्होंने पारस पत्थर को किले में मौजूद तालाब के अंदर फेंक दिया। राजा ने ये किसी को नहीं बताया कि पारस पत्थर को कहां छुपाया है। बाद में युद्ध के दौरान उनकी मृत्यु हो गई और देखते ही देखते ये किला भी वीरान हो गया।

बता दें, कई बार राजाओं ने पारस पत्थर की खोज में किले को खुदवाया, लेकिन असफल रहे। आज भी लोग यहां रात के समय पारस पत्थर की तलाश में तांत्रिकों को अपने साथ लेकर जाते हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।

माना ये भी जाता है कि इस किले और पारस पत्थर को ढूंढ़ने आने वाले कई लोग अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं, क्योंकि पारस पत्थर की रक्षा एक जिन्न करता है। हालांकि, पुरातत्व विभाग को अब तक ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि पारस पत्थर इसी किले में मौजूद है, लेकिन कही सुनी कहानियों की वजह से लोग चोरी छिपे यहां पारस पत्थर की तलाश में पहुंचते हैं।

नई दिल्ली। दुनिया में आज भी ऐसे कई चमत्कारी चीजें मौजूद हैं, जिनके बारे में शायद किसी ने सुना हो। ऐसा ही एक चमत्कारी पत्थर है जिसे पारस पत्थर के नाम से जाना जाता है। जिसके बारे में आपने अक्सर कहानियों में और किस्सों में सुना होगा। वहीं, आज तक इस पत्थर को कोई खोज नहीं पाया है। आप ये जानकर जरूर हैरान रह जाएंगे कि एक किले में इसके होने का दावा किया जाता है। यही वजह है कि हर साल किले में लोग खुदाई करने पहुंच जाते हैं। दरअसल, इस पत्थर के बारे में कहा जाता है कि ये वो पत्थर है जिसे छूते ही लोहा भी सोना बन जाता है। माना जाता है कि भोपाल से 50 किलोमीटर दूर रायसेन के किले में यह पत्थर मौजूद है। साथ ही ये भी माना जाता है कि इस किले के राजा के पास पारस पत्थर मौजूद था। इतना ही नहीं इस पत्थर के लिए कई बार युद्ध हुए, लेकिन जब इस किले के राजा को लगा कि वह युद्ध हार जाएंगे तो उन्होंने पारस पत्थर को किले में मौजूद तालाब के अंदर फेंक दिया। राजा ने ये किसी को नहीं बताया कि पारस पत्थर को कहां छुपाया है। बाद में युद्ध के दौरान उनकी मृत्यु हो गई और देखते ही देखते ये किला भी वीरान हो गया। बता दें, कई बार राजाओं ने पारस पत्थर की खोज में किले को खुदवाया, लेकिन असफल रहे। आज भी लोग यहां रात के समय पारस पत्थर की तलाश में तांत्रिकों को अपने साथ लेकर जाते हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। माना ये भी जाता है कि इस किले और पारस पत्थर को ढूंढ़ने आने वाले कई लोग अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं, क्योंकि पारस पत्थर की रक्षा एक जिन्न करता है। हालांकि, पुरातत्व विभाग को अब तक ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि पारस पत्थर इसी किले में मौजूद है, लेकिन कही सुनी कहानियों की वजह से लोग चोरी छिपे यहां पारस पत्थर की तलाश में पहुंचते हैं।