प्रशांत किशोर को लेकर बिहार में शुरू हुई सियासत, जेडीयू ने कहा वह किसी के साथ काम करें पार्टी से कोई मतलब नहीं है

prashant kishor
प्रशांत किशोर को लेकर बिहार में शुरू हुई सियासत, जेडीयू ने कहा वह किसी के साथ काम करें पार्टी से कोई मतलब नहीं है

नई दिल्ली। जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को लेकर बिहार में सियासत शुरू हो गयी है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद से विपक्षी जेडीयू पर तंज कस रहे हैं। उनका कहना है कि यह जेडीयू का आंतरिक मामला है, यह केवल नीतिश कुमार की पार्टी में ही हो सकता है। वहीं, जेडीयू का कहना है कि उन्हें प्रशांत किशोर की कंपनी किसी के साथ काम करे उनकी पार्टी को मतलब नहीं है।

The Politics Started In Bihar With Prashant Kishore :

लोकसभा चुनाव 2014 के बाद चर्चा में आए प्रशांत किशोर को राजनीति में चाणक्य कहा जाता है। जो विश्लेषण कर चुनाव में सफलता दिलाने के लिए मदद करती है। हाल ही में आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जगमोहन रेड्डी के साथ उन्होंने चुनाव में काम किया और उन्हें सफलता दिलाने में मदद की। वहीं दो दिनों पूर्व पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से प्रशांत किशोर ने मुलाकात की थी।

आशंका है कि अब प्रशांत किशोर बंगाल में ममता बनर्जी के साथ भी इसी तर्ज पर काम कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो उन्होंने इसके लिए ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद बिहार में सियासत तेज हो गई। ऐसा इसिलए क्योंकि प्रशांत किशोर जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उनकी पार्टी एनडीए की सहयोगी पार्टी है। जबकि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी एनडीए की धुर विरोधी है। ऐसे में प्रशांत किशोर के एक राजनीतिक पार्टी के उपाध्यक्ष होते हुए अपने गठबंधन के विरोधी दल की मदद की बात किसी के गले नहीं उतर रही है।

प्रशांत किशोर के इस कदम के बाद पार्टी के अंदर उनका विरोध शुरू हो गया है। वहीं इसको लेकर जेडीयू का कहना है कि उन्हें प्रशांत किशोर के ऐसे किसी काम से कोई मतलब नहीं हैं। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा है कि प्रशांत किशोर की निजी कंपनी IPAC विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए भिन्न विचारधाराओं के होने के बावजूद काम करती है। लेकिन इससे पार्टी को कोई दिक्कत नहीं है।

नई दिल्ली। जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को लेकर बिहार में सियासत शुरू हो गयी है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद से विपक्षी जेडीयू पर तंज कस रहे हैं। उनका कहना है कि यह जेडीयू का आंतरिक मामला है, यह केवल नीतिश कुमार की पार्टी में ही हो सकता है। वहीं, जेडीयू का कहना है कि उन्हें प्रशांत किशोर की कंपनी किसी के साथ काम करे उनकी पार्टी को मतलब नहीं है। लोकसभा चुनाव 2014 के बाद चर्चा में आए प्रशांत किशोर को राजनीति में चाणक्य कहा जाता है। जो विश्लेषण कर चुनाव में सफलता दिलाने के लिए मदद करती है। हाल ही में आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जगमोहन रेड्डी के साथ उन्होंने चुनाव में काम किया और उन्हें सफलता दिलाने में मदद की। वहीं दो दिनों पूर्व पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से प्रशांत किशोर ने मुलाकात की थी। आशंका है कि अब प्रशांत किशोर बंगाल में ममता बनर्जी के साथ भी इसी तर्ज पर काम कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो उन्होंने इसके लिए ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद बिहार में सियासत तेज हो गई। ऐसा इसिलए क्योंकि प्रशांत किशोर जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उनकी पार्टी एनडीए की सहयोगी पार्टी है। जबकि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी एनडीए की धुर विरोधी है। ऐसे में प्रशांत किशोर के एक राजनीतिक पार्टी के उपाध्यक्ष होते हुए अपने गठबंधन के विरोधी दल की मदद की बात किसी के गले नहीं उतर रही है। प्रशांत किशोर के इस कदम के बाद पार्टी के अंदर उनका विरोध शुरू हो गया है। वहीं इसको लेकर जेडीयू का कहना है कि उन्हें प्रशांत किशोर के ऐसे किसी काम से कोई मतलब नहीं हैं। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा है कि प्रशांत किशोर की निजी कंपनी IPAC विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए भिन्न विचारधाराओं के होने के बावजूद काम करती है। लेकिन इससे पार्टी को कोई दिक्कत नहीं है।